अमेरिका में कॉर्पोरेट मुनाफे ने **$4.8 ट्रिलियन** का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया है, जो कुल नेशनल इनकम का **18%** है। हैरान करने वाली बात यह है कि इसी दौरान कर्मचारियों की आय का हिस्सा गिरकर **60%** पर आ गया है, जो **1950** के दशक के बाद का सबसे निचला स्तर है।
मुनाफे की रेस और गिरती आमदनी
ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में अमेरिका की कंपनियों का प्री-टैक्स प्रॉफिट $4.8 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन 19.4% तक पहुंच गए हैं, जो 1940 के दशक के बाद से नहीं देखे गए थे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बेहतर प्राइसिंग पावर की मदद से कंपनियां अपना मार्जिन तो बढ़ा रही हैं, लेकिन दूसरी ओर वर्कफोर्स की हालत खराब है।
क्यों चिंता में हैं निवेशक?
यह डेटा निवेशकों के लिए दोधारी तलवार जैसा है। एक तरफ कंपनियां शानदार कमाई कर रही हैं, जिससे इक्विटी मार्केट में तेजी बनी हुई है। दूसरी तरफ, जुलाई 2026 में रियल अवरली अर्निंग्स में 0.2% की गिरावट आई है। अगर आम लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) ऐसे ही घटती रही, तो भविष्य में कंज्यूमर स्पेंडिंग में कमी आएगी, जो सीधे तौर पर कंपनियों के रेवेन्यू पर चोट करेगी।
राजनीतिक और आर्थिक जोखिम
इस बढ़ती खाई के कारण अमेरिका में राजनीतिक तनाव भी बढ़ रहा है। सरकार और रेग्युलेटर्स पर दबाव है कि वे वेल्थ इनइक्वलिटी को कम करने के लिए कुछ कड़े कदम उठाएं। आने वाले समय में रिटेल सेल्स डेटा और फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि अगर यह असंतुलन जारी रहा, तो बाजार में पॉलिसी बदलावों का खतरा बढ़ सकता है।
