दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, US और China ने व्यापारिक तनाव कम करने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों देशों ने **$60 अरब** के ट्रेड पर टैरिफ कम करने का फैसला किया है, जिससे ग्लोबल मार्केट में स्थिरता की उम्मीद जगी है।
व्यापार को मिली नई रफ्तार
अमेरिका और चीन के बीच हुई यह डील कुल $60 अरब के व्यापार पर असर डालेगी, जिसमें दोनों देशों के लिए $30-30 अरब का हिस्सा तय किया गया है। इसका सीधा फायदा एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स, मेडिकल डिवाइसेस और घरेलू सामानों (toys & appliances) को मिलेगा।
नया बोर्ड करेगा निगरानी
इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए 'US-China Board of Trade' का गठन किया गया है। इसमें US ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent और US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव Jamieson Greer, चीनी वाइस प्रीमियर He Lifeng के साथ मिलकर काम करेंगे। यह बोर्ड अमेरिका के 77 टैरिफ एंट्रीज पर नजर रखेगा ताकि नियमों का सही पालन हो सके।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इस डील के भारतीय बाजार पर मिले-जुले असर हो सकते हैं:
- मार्केट सेंटीमेंट: वैश्विक तनाव कम होने से दुनिया भर में रिस्क एपेटाइट बढ़ेगा, जो भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश (FII) के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।
- 'China Plus One' स्ट्रैटेजी: यह भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक चुनौती बन सकती है। अब तक कंपनियां चीन से शिफ्ट होकर भारत आ रही थीं, लेकिन अगर चीन में सामान सस्ता होता है, तो कंपनियों का भारत की ओर रुख करने का पेस (गति) कम हो सकता है।
फिलहाल, इस डील का असर तभी दिखेगा जब दोनों देश अपनी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर इसे लागू करेंगे। निवेशकों को अब ग्लोबल कमोडिटी और एग्री-एक्सपोर्ट सेक्टर पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
