US Economy: बजट घाटा **$1.99 ट्रिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर, भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?

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AuthorAditya Rao|Published at:
US Economy: बजट घाटा **$1.99 ट्रिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर, भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?

अमेरिकी सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में **$1.99 ट्रिलियन** का भारी-भरकम बजट घाटा दर्ज किया है, जो पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा है। इसकी मुख्य वजह कर्ज पर बढ़ता ब्याज का बोझ है। यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार और विदेशी निवेश (FPI) के लिहाज से अहम है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026 में सरकार का कुल खर्च $7.4 ट्रिलियन रहा, जबकि कमाई केवल $5.40 ट्रिलियन ही हो पाई। यह अंतर पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ गया है और साल 2021 के बाद का सबसे बड़ा घाटा है।

ब्याज का बोझ सबसे बड़ी चुनौती

इस घाटे के पीछे सबसे बड़ा कारण नेशनल डेट पर चुकाया जाने वाला ब्याज है। सरकारी खजाने से इस साल ब्याज के रूप में $1.36 ट्रिलियन खर्च किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 12% अधिक है। अब अमेरिका का कुल नेशनल डेट $40 ट्रिलियन के पार निकल चुका है, जिससे सरकार के सामने अन्य जरूरी विकास कार्यों के लिए फंड जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

डिफेंस और अन्य खर्च

वित्तीय दबाव के अन्य कारणों में डिफेंस स्पेंडिंग का $917 बिलियन तक पहुंचना शामिल है, जो कि 6% की बढ़ोतरी है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद सरकार को $145 बिलियन का टैरिफ रिफंड भी देना पड़ा, जिससे सरकारी राजस्व में $22 बिलियन की कमी आई।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

फिलहाल अमेरिका का डेफिसिट-टू-जीडीपी रेशियो 6.2% तक पहुंच गया है। अमेरिकी सरकार जब भी भारी कर्ज लेती है, तो ग्लोबल बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में हलचल तेज हो जाती है। अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगाना पसंद करते हैं। इससे रुपये में उतार-चढ़ाव आ सकता है और FPI निवेश पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को अब अमेरिकी ट्रेजरी की भविष्य की बरोइंग योजनाओं पर कड़ी नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.