US Bond Yields: AI सेक्टर की चमक होगी फीकी? **5.2%** के यील्ड से बढ़ा खतरा

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AuthorAditya Rao|Published at:
US Bond Yields: AI सेक्टर की चमक होगी फीकी? **5.2%** के यील्ड से बढ़ा खतरा

US Treasury Yields में उछाल के कारण AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव है। कर्ज महंगा होने और रेगुलेटरी बाधाओं के चलते कंपनियां अब अंधाधुंध खर्च के बजाय कैपिटल एफिशिएंसी पर ध्यान दे रही हैं।

AI सेक्टर में निवेश का मिजाज तेजी से बदल रहा है। सितंबर 2026 के अंत तक 10-वर्षीय US Treasury Yield 5.12% से 5.23% के स्तर पर पहुंच गया है। इसका सीधा असर टेक कंपनियों की जेब पर पड़ रहा है। बीते दो सालों में जिस रफ्तार से AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड झोंके जा रहे थे, अब उस पर लगाम लग रही है।

कर्ज हुआ महंगा, बदली रणनीति

'हाइपरस्केलर्स' (बड़ी टेक कंपनियां) के लिए अब सस्ती पूंजी का दौर खत्म हो चुका है। कर्ज की लागत बढ़ने से इनके डेट स्प्रेड्स में 15 से 22 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी देखी गई है। अब कंपनियां 'ग्रोथ एट एनी प्राइस' (हर कीमत पर विकास) की नीति छोड़कर CFO के नेतृत्व में अधिक सतर्क रुख अपना रही हैं। छोटे प्लेयर्स के लिए तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जिन्हें अपनी परियोजनाओं के लिए फंडिंग जुटाना मुश्किल हो रहा है।

रेगुलेटरी और रिवेन्यू की चुनौती

सिर्फ कर्ज ही नहीं, डेटा सेंटर्स को लेकर सरकारों की सख्ती भी एक बड़ी बाधा है। बिजली की भारी खपत और जमीन की जरूरतों को लेकर रेगुलेटर्स ने स्क्रूटनी बढ़ा दी है, जिससे कई प्रोजेक्ट्स अटक गए हैं या रद्द हो रहे हैं।

निवेशक अब 'रेवेन्यू गैप' को लेकर चिंतित हैं। 2026 में हाइपरस्केलर्स का कैपिटल स्पेंडिंग $700 बिलियन से $1 ट्रिलियन के बीच रहने का अनुमान है, लेकिन इसके मुकाबले मुनाफे का कोई साफ रास्ता न दिखना चिंता का विषय है। अब बाजार उन्हीं कंपनियों पर भरोसा करेगा जो फ्री कैश फ्लो और रिटर्न ऑन इन्वेस्टेड कैपिटल (ROIC) को बेहतर दिखा सकेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.