US 10-Year Treasury Yield में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ग्लोबल मार्केट को थोड़ी राहत मिली है। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि US की ब्याज दरों का सीधा असर भारत में आने वाले विदेशी निवेश (FIIs) पर पड़ता है।
शुक्रवार को ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में थोड़ी स्थिरता देखी गई क्योंकि 10-वर्षीय US Treasury Yield में मामूली गिरावट आई। गुरुवार को यह 5.20% के पार निकल गया था, जो अब घटकर 5.18% के लेवल पर आ गया है। हालांकि यह एक हल्की राहत है, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि सितंबर की शुरुआत से अब तक इसमें करीब 40 बेसिस पॉइंट्स का उछाल आ चुका है, जो बॉन्ड मार्केट में भारी दबाव को दर्शाता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
जब US में यील्ड बढ़ती है, तो वहां की सिक्योरिटीज ग्लोबल निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाती हैं। ऐसे में अक्सर विदेशी निवेशक भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर US मार्केट में शिफ्ट कर देते हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार की लिक्विडिटी प्रभावित होती है और रुपये पर भी दबाव बनता है। निवेशकों को आने वाले हफ्तों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की एक्टिविटी पर नजर रखनी होगी।
कच्चे तेल की चिंता बरकरार
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्रूड ऑयल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। Brent Crude की कीमतें $98.83 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें देश के ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को बढ़ाती हैं और महंगाई का खतरा पैदा करती हैं। इसका सीधा असर उन कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है जो तेल पर निर्भर हैं।
आगे की राह
फिलहाल, मार्केट की नजरें ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा और सेंट्रल बैंकों के बयानों पर टिकी हैं। जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता के कारण निवेश का माहौल अभी भी संभलकर चलने वाला है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां इस चुनौतीपूर्ण दौर में अपने ऑपरेशनल खर्च को कैसे मैनेज करती हैं, यह आने वाले क्वार्टरली नतीजों में तय करेगा।
