US 30-Year Treasury Yield: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में 22 साल की सबसे बड़ी उछाल, भारतीय बाजार के लिए बड़े संकेत

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
US 30-Year Treasury Yield: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में 22 साल की सबसे बड़ी उछाल, भारतीय बाजार के लिए बड़े संकेत

दुनिया भर के बॉन्ड मार्केट में हड़कंप मचा है क्योंकि US 30-Year Treasury Yield बढ़कर **5.59%** के स्तर पर पहुंच गई है, जो साल 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। इस वैश्विक बदलाव से भारतीय निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है क्योंकि विदेशी निवेश के बाहर जाने और रुपये पर दबाव का खतरा गहरा रहा है।

बाजार क्यों डरा हुआ है?

अमेरिका के 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.59% तक पहुंचना कोई छोटी बात नहीं है। वहीं, 10-वर्षीय यील्ड भी 5.24% पर कारोबार कर रही है। इस बिकवाली के पीछे मुख्य वजहें लगातार बनी हुई महंगाई, सरकार की भारी उधारी और बढ़ती एनर्जी कॉस्ट हैं। जब सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी बॉन्ड पर 5% से ज्यादा का रिटर्न मिलने लगता है, तो दुनिया भर के निवेशक इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट की ओर भागने लगते हैं।

भारतीय बाजार पर क्या असर होगा?

ऐतिहासिक रूप से जब भी अमेरिकी यील्ड ऊपर जाती है, तो फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) उभरते बाजारों जैसे भारत से पैसा निकाल लेते हैं। इससे निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड के मजबूत होने से डॉलर (Dollar) इंडेक्स में तेजी आती है, जिससे रुपया कमजोर होता है। रुपया कमजोर होने से भारत के लिए क्रूड ऑयल (Crude Oil) का इंपोर्ट महंगा हो जाता है, जो देश के करंट अकाउंट और महंगाई पर सीधा असर डालता है। RBI की ब्याज दरों को मैनेज करने की चुनौती भी और जटिल हो सकती है।

अब आगे क्या?

भारतीय कॉरपोरेट्स के लिए भी विदेशी कर्ज लेना अब महंगा हो सकता है। फिलहाल निवेशकों को फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की कमेंट्री और आने वाले अमेरिकी इन्फ्लेशन डेटा पर पैनी नजर रखनी होगी। घरेलू स्तर पर FPIs की डेली एक्टिविटी भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.