अमेरिका में 30-वर्षीय मॉर्गेज रेट्स उछलकर **6.71%** पर पहुंच गए हैं, जो जुलाई **2025** के बाद का उच्चतम स्तर है। बढ़ती महंगाई और ट्रेजरी यील्ड के कारण यह बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर भारतीय बाजारों और FII निवेश पर भी पड़ सकता है।
बढ़ती महंगाई और ट्रेजरी यील्ड का दबाव
Freddie Mac के लेटेस्ट डेटा के अनुसार, अमेरिका में 30-वर्षीय फिक्स्ड मॉर्गेज रेट्स 6.66% से बढ़कर 6.71% हो गए हैं। मॉर्गेज रेट्स आमतौर पर 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का अनुसरण करते हैं। हाल के हफ्तों में, अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव और जिद्दी महंगाई के कारण यील्ड में तेजी आई है, जिससे निवेशकों को सरकारी बॉन्ड्स पर बेहतर रिटर्न की उम्मीद है। इसका सीधा असर बैंक के लॉन्ग-टर्म होम लोन फंड्स की लागत पर पड़ा है।
भारतीय बाजारों के लिए क्या हैं संकेत?
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का मतलब है डॉलर का मजबूत होना। जब डॉलर मजबूत होता है, तो उभरते बाजारों (Emerging Markets) जैसे भारत से FII अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी एसेट्स में लगा सकते हैं। इससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और उन भारतीय कंपनियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं जिन्होंने विदेशी कर्ज ले रखा है। भारतीय निवेशक इसे ग्लोबल लिक्विडिटी के बैरोमीटर की तरह देख रहे हैं।
फेडरल रिजर्व की अगली चाल
फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के अनुसार, आगामी 15-16 सितंबर की पॉलिसी मीटिंग पूरी तरह से 11 सितंबर, 2026 को आने वाले अगस्त के महंगाई डेटा पर निर्भर करेगी। फिलहाल मार्केट दो हिस्सों में बंटा हुआ है। यदि अगस्त का डेटा अनुमान से अधिक आता है, तो फेड 'हॉकिश' (Hawkish) रुख अपना सकता है, जिससे ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता बढ़ सकती है।
