क्या आप भी ऐप डिलीट कर देने के बाद ये समझते हैं कि आपकी सब्सक्रिप्शन बंद हो गई है? यह आपकी सबसे बड़ी भूल हो सकती है। अपने बैंक बैलेंस को सुरक्षित रखने के लिए UPI AutoPay मैंडेट को मैन्युअली रिवोक करना बेहद जरूरी है।
UPI AutoPay ने बिल पेमेंट, म्यूचुअल फंड SIP और OTT सब्सक्रिप्शन को काफी आसान बना दिया है। लेकिन यही सुविधा कभी-कभी आपके लिए वित्तीय नुकसान का कारण बन जाती है। कई बार हम उन सेवाओं के लिए भी पैसे देते रहते हैं जिनका हम इस्तेमाल नहीं करते।
ऐप डिलीट करना काफी नहीं
ज्यादातर यूजर्स को लगता है कि मर्चेंट ऐप को फोन से अनइंस्टॉल करने या अकाउंट डिलीट करने से पेमेंट अपने आप रुक जाएगी। यह पूरी तरह से गलत है। UPI AutoPay का मैंडेट बैंक के इंफ्रास्ट्रक्चर लेवल पर स्टोर होता है, न कि केवल उस ऐप के अंदर। जब आप मैंडेट सेट करते हैं, तो आप मर्चेंट को अपने अकाउंट से पैसे काटने की अनुमति देते हैं। ऐप हटाने से यह अनुमति रद्द नहीं होती।
एक्टिव मैंडेट्स को ऐसे करें चेक
अपने खर्चों पर कंट्रोल रखने के लिए आपको अपने UPI ऐप में मौजूद 'Mandates' या 'AutoPay' सेक्शन को समय-समय पर चेक करना चाहिए। वहां आप देख सकते हैं कि कौन-कौन सी सेवाएं ऑटो-पेमेंट पर हैं। अगर कोई ऐसी सर्विस दिखती है जिसकी अब जरूरत नहीं है, तो आप अपने UPI PIN का उपयोग करके उसे तुरंत बंद (Revoke) कर सकते हैं। ध्यान रहे, UPI AutoPay की सामान्य लिमिट ₹15,000 है, हालांकि म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस के लिए यह ज्यादा हो सकती है।
सर्विस कैंसिलेशन और पेमेंट में अंतर
यह समझना जरूरी है कि मैंडेट को रिवोक करना और सर्विस कॉन्ट्रैक्ट खत्म करना दो अलग बातें हैं। मैंडेट रोकने से केवल पैसा कटना बंद होता है, लेकिन मर्चेंट को यह पता नहीं चलता कि आपने सर्विस छोड़ दी है। यूटिलिटी बिल या इंश्योरेंस के मामले में पेमेंट न होने पर आपको पेनल्टी लग सकती है। इसलिए, मैंडेट हटाने के साथ-साथ संबंधित सर्विस प्रोवाइडर के पास जाकर आधिकारिक रूप से सब्सक्रिप्शन रद्द जरूर करें।
अगर आपको कोई संदिग्ध पेमेंट दिखे, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें। हर तिमाही में अपने एक्टिव मैंडेट्स की समीक्षा करना एक अच्छी वित्तीय आदत है, ताकि आपकी मेहनत की कमाई बेवजह खर्च न हो।
