उत्तर प्रदेश का नया मिशन: 95,000 गांवों में अब बदलेगी वेस्ट मैनेजमेंट की सूरत

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AuthorMehul Desai|Published at:
उत्तर प्रदेश का नया मिशन: 95,000 गांवों में अब बदलेगी वेस्ट मैनेजमेंट की सूरत

उत्तर प्रदेश ने अपनी ग्रामीण स्वच्छता रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। शौचालय निर्माण के बाद अब राज्य का फोकस **95,000** से ज्यादा गांवों में ODF प्लस फ्रेमवर्क के जरिए सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट पर है, जिससे ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में लंबे समय तक नई मांग पैदा होगी।

उत्तर प्रदेश की स्वच्छता नीति अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। राज्य ने खुले में शौच मुक्त (ODF) होने के बाद अब अपना पूरा ध्यान सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट पर केंद्रित कर दिया है। सरकार 95,000 से अधिक गांवों में ODF प्लस फ्रेमवर्क को लागू कर रही है, ताकि स्वच्छता के लाभ बरकरार रहें।

निर्माण से मेंटेनेंस तक का सफर

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के पिछले फेज में सरकार का मुख्य जोर 2.68 करोड़ घरों में शौचालय बनवाने पर था। अब यह अप्रोच पूरी तरह बदल गई है। अब ध्यान 'वन-टाइम कैपिटल स्पेंडिंग' (एक बार खर्च) से हटकर 'ऑपरेशनल रिक्वायरमेंट्स' यानी डेली मेंटेनेंस पर आ गया है। ग्राम पंचायतों को अब ऐसे सिस्टम में ढाला जा रहा है, जो खुद को आत्मनिर्भर बना सकें और केंद्रीय मदद पर निर्भरता कम हो।

बिजनेस और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए क्या है मौके?

ODF प्लस का यह मॉडल टेक्नोलॉजी, वेस्ट प्रोसेसिंग और वाटर मैनेजमेंट इक्विपमेंट की लगातार मांग पैदा कर रहा है। पहले फेज में सिर्फ निर्माण था, लेकिन अब ग्रे-वाटर ट्रीटमेंट और मशीनरी की देखरेख के लिए प्रोफेशनल सर्विस प्रोवाइडर्स की जरूरत बढ़ गई है। राज्य ने 1 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को इस काम के लिए ट्रेंड किया है, जिससे ग्रामीण सैनिटेशन सेक्टर अब एक संगठित और प्रोफेशनल स्वरूप ले रहा है।

बड़ी चुनौतियां और रिस्क

इस योजना की सफलता स्थानीय निकायों की कार्यक्षमता पर टिकी है। बड़ा रिस्क यह है कि अगर फंड की कमी हुई या टेक्निकल एक्सपर्टाइज की कमी आई, तो करोड़ों का यह इंफ्रास्ट्रक्चर बेकार हो सकता है। वेस्ट और वाटर ट्रीटमेंट के लिए लगातार निगरानी और इक्विपमेंट सर्विसिंग जरूरी है। यदि ग्राम पंचायतें प्रभावी ढंग से कॉन्ट्रैक्ट्स का प्रबंधन नहीं कर पाती हैं, तो ये एसेट वित्तीय बोझ भी बन सकते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशक अब यह देख रहे हैं कि पंचायतें किस तरह सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स अवॉर्ड करती हैं और सरकार इनकी वित्तीय निरंतरता कैसे सुनिश्चित करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.