Uttar Pradesh ने भारत के घरेलू पर्यटन (Domestic Tourism) में बाजी मार ली है। राज्य का कुल विजिटर-ट्रिप्स में **15.7%** का हिस्सा है, जो हॉस्पिटैलिटी, एविएशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए बड़े ग्रोथ संकेत हैं।
टूरिज्म में यूपी का जलवा
सांख्यिकी मंत्रालय (Ministry of Statistics) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच घरेलू पर्यटन में उत्तर प्रदेश ने पहला स्थान हासिल किया है। इस लिस्ट में तमिलनाडु 13.4% हिस्सेदारी के साथ दूसरे और राजस्थान 8% के साथ तीसरे नंबर पर है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि बेहतर कनेक्टिविटी और रीजनल डेवलपमेंट से ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर खर्च बढ़ रहा है।
धार्मिक और मेडिकल टूरिज्म का असर
कुल यात्राओं में 48% योगदान सिर्फ धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) का है। जहाँ ग्रामीण इलाकों से मेडिकल सेवाओं के लिए यात्राएं बढ़ रही हैं, वहीं शहरी आबादी लेजर और रिक्रिएशन पर जोर दे रही है। आंकड़ों के अनुसार, हर 100 ग्रामीण परिवारों पर 127 और शहरी परिवारों पर 132 ओवरनाइट ट्रिप्स दर्ज की गई हैं, जो पिछले सालों की तुलना में काफी ज्यादा है।
निवेशकों के लिए 'वॉच लिस्ट'
यह ट्रेंड हॉस्पिटैलिटी चेन और ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के लिए सीधे मुनाफे का सौदा है। जिन कंपनियों ने उत्तर भारत के आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्रों में विस्तार किया है, उनकी रेवेन्यू ग्रोथ में मजबूती दिख सकती है। इसके अलावा, सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस—जैसे नए एयरपोर्ट्स और एक्सप्रेसवे—एविएशन और रेलवे बुकिंग कंपनियों को फायदा पहुंचा रहा है।
चुनौतियां और रिस्क
निवेशकों को सीजनैलिटी (Seasonality) का ध्यान रखना होगा। मई और अक्टूबर में भीड़ बढ़ने से इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ जाता है। अगर होटल सप्लाई और कनेक्टिविटी इस डिमांड के साथ कदमताल नहीं कर पाई, तो सर्विस क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, मेडिकल टूरिज्म में शहरी परिवारों का प्रति यात्रा खर्च ₹41,649 है, जो यह साबित करता है कि यह सेगमेंट साल भर मांग पैदा करने वाला एक स्टेबल सेक्टर है।
