ग्रेटर नोएडा में चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का आगाज हो चुका है। इस आयोजन में **2,400** से ज्यादा एग्जीबिटर्स हिस्सा ले रहे हैं और सरकार का लक्ष्य **₹13,500 करोड़** के बिजनेस इंक्वायरी का है।
हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग पर दांव
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में शुरू हुआ यह पांच दिवसीय आयोजन केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार अब 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) के अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों को बढ़ावा दे रही है। इसमें ऑस्ट्रिया, जापान, रूस, सिंगापुर, वियतनाम और बेलारूस जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
निवेश का 'कन्वर्जन रेट' है असली चुनौती
इन्वेस्टर के नजरिए से देखें, तो यह ट्रेड शो यूपी में इंडस्ट्रियल सेंटीमेंट को समझने का एक बड़ा पैमाना है। हालांकि, कागजों पर बड़े निवेश के वादे और एमओयू (MOU) की भरमार रहती है, लेकिन असल सवाल 'कन्वर्जन रेट' का है। यानी इन एग्रीमेंट्स में से कितने प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतरेंगे और कब तक नौकरियों के अवसर पैदा करेंगे?
सफलता के लिए क्या जरूरी?
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जमीन की उपलब्धता, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए कुशल लेबर का होना सबसे जरूरी है। साथ ही, एमएसएमई (MSME) क्लस्टर्स को ग्लोबल सप्लाई चेन के साथ जोड़ना और रेग्युलेटरी अप्रूवल्स को आसान बनाना भी निर्णायक साबित होगा। ट्रेड शो के बाद आने वाली रिपोर्ट्स ही बताएंगी कि यह निवेश सिर्फ एक शुरुआती कल्पना है या राज्य वाकई में बड़े औद्योगिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है।
