उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में महिला वर्कफोर्स भागीदारी में जबरदस्त उछाल आया है। साल **2017** में यह आंकड़ा महज **13%** था, जो **2026** में बढ़कर **36%** के स्तर पर पहुंच गया है। सरकार के मुताबिक, राज्य में सुरक्षा के माहौल में सुधार और व्यापारिक घंटों के विस्तार ने इसे संभव बनाया है।
आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव
यूपी सरकार की तरफ से जारी ये आंकड़े राज्य की आर्थिक सेहत में आए बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। महिला वर्कफोर्स की भागीदारी किसी भी क्षेत्र की उत्पादकता और आर्थिक विकास का एक प्रमुख पैमाना मानी जाती है। 2017 के 13% के मुकाबले 2026 में 36% का आंकड़ा यह साफ करता है कि राज्य में अब एक बड़ा और विविध टैलेंट पूल उपलब्ध है।
सुरक्षा और निवेश का कनेक्शन
प्रशासन का कहना है कि इस ग्रोथ के पीछे राज्य का नया 'जीरो-टॉलरेंस' सुरक्षा ढांचा मुख्य वजह है। निवेशकों और कंपनियों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है। एक बड़ी और कुशल कार्यबल शक्ति न केवल मैन्युफैक्चरिंग बल्कि सर्विस सेक्टर में भी डिमांड और सप्लाई चेन को मजबूती देती है।
नाइट-टाइम इकोनॉमी का विस्तार
बेहतर सुरक्षा व्यवस्था का सीधा असर कमर्शियल एक्टिविटी पर भी पड़ा है। अब राज्य में कारोबार देर रात तक संचालित हो पा रहे हैं, जो पहले सुरक्षा कारणों से सीमित थे। इससे कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ी है और वे बिना किसी रुकावट के अलग-अलग शिफ्ट्स में काम कर पा रही हैं।
आने वाले समय में, बाजार के जानकारों की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह ट्रेंड औद्योगिक विकास और प्रति व्यक्ति आय (Per-capita income) में बढ़ोतरी के साथ तालमेल बिठा पाता है। राज्य में निवेश आकर्षित करने की इस दौड़ में, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी आने वाले समय में एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है।
