UNEP की नई रिपोर्ट ने वैश्विक तापमान में 1.5°C की वृद्धि रोकने के लक्ष्य को लगभग असंभव बताया है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि आने वाले समय में सख्त जलवायु नियमों के कारण हाई-एमिशन वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और ग्रीन एनर्जी की ओर संक्रमण तेज होगा।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने अपनी ताजा 'एमिशन्स गैप रिपोर्ट' में चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान को 1.5°C तक सीमित रखना अब नीतिगत रूप से संभव नहीं रह गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 58.4 गीगाटन CO2 के बराबर रहा। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें केवल 0.1 गीगाटन की मामूली गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण क्लीन एनर्जी नहीं, बल्कि जंगल की आग की घटनाओं में कमी आना है।
फॉसिल फ्यूल्स का बढ़ता दबाव
रिपोर्ट बताती है कि कोयला, तेल और गैस जैसे फॉसिल फ्यूल्स का योगदान अभी भी वैश्विक उत्सर्जन में दो-तिहाई से अधिक है। हालांकि कई देश कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण जीवाश्म ईंधन से होने वाला उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है।
G20 देशों की बड़ी जिम्मेदारी
G20 देश (अफ्रीकी संघ को छोड़कर) दुनिया के कुल उत्सर्जन के 76 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं। चिंताजनक बात यह है कि 2025 में इनके कुल उत्सर्जन में 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। इससे स्पष्ट है कि उन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर सख्त पर्यावरण नीतियों का दबाव बढ़ेगा जहां औद्योगिक विकास अभी भी पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि वैश्विक आर्थिक माहौल अब सख्त क्लाइमेट कंप्लायंस की ओर बढ़ रहा है। सीमेंट, स्टील, थर्मल पावर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-एमिशन सेक्टर में कार्बन ट्रांजिशन और नए पर्यावरण टैक्स के कारण परिचालन लागत (Operational Costs) बढ़ सकती है। जो कंपनियां ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) या रिन्यूएबल विकल्पों में निवेश नहीं करेंगी, वे भविष्य में बड़े रिस्क में होंगी।
आगे की राह
ग्लोबल वार्मिंग को स्थिर करने के लिए रिपोर्ट में 2030 तक ग्रीनहाउस गैसों में 18 प्रतिशत और 2035 तक 45 प्रतिशत की भारी कटौती का सुझाव दिया गया है। भविष्य में कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी, फॉसिल फ्यूल फेज़-आउट नीतियां और ESG कंप्लायंस मानक तय करेंगे कि कौन सा बिजनेस टिकाऊ रहेगा और कौन सा पीछे छूट जाएगा।
