UNCTAD ने साल **2026** के लिए ग्लोबल इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान घटाकर **2.6%** कर दिया है, जो **2025** में **2.9%** था। इस सुस्ती के पीछे वेस्ट एशिया में जारी तनाव और एनर्जी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव मुख्य वजह है।
ग्लोबल ट्रेड एंड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में चेतावनी दी गई है कि वेस्ट एशिया की अस्थिरता न केवल एनर्जी मार्केट बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी दबाव बना रही है।\n\n### ट्रेड की हकीकत क्या है?\n\nहालांकि 2025 में ग्लोबल ट्रेड का आंकड़ा रिकॉर्ड $35 ट्रिलियन तक पहुंच गया था, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे मजबूती नहीं मान रहे हैं। इसका बड़ा हिस्सा एनर्जी की बढ़ती कीमतों के कारण है, न कि सामानों के बढ़ते वॉल्यूम के कारण। अगर कीमतों के असर को हटा दें, तो 2026 में ट्रेड में केवल 4% की ग्रोथ की उम्मीद है, जो मार्केट की नाजुक स्थिति को दर्शाता है।\n\n### एशिया का दबदबा बरकरार\n\nसुस्ती के बावजूद एशिया दुनिया की ग्रोथ का इंजन बना रहेगा। UNCTAD के मुताबिक, 2026 में ग्लोबल ग्रोथ में एशिया की हिस्सेदारी 59% रहने का अनुमान है। इसमें भारत की ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान है, जबकि चीन के लिए यह आंकड़ा 4.5% है। गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड 2024 के मुकाबले 20% से ज्यादा गिर चुका है।\n\n### निवेश और जोखिम पर नजर\n\nइन्वेस्टर्स के लिए चुनौती केवल ग्रोथ की नहीं है, बल्कि ट्रेड पाबंदियों की भी है। सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे हाई-टेक सेक्टर में बढ़ते एक्सपोर्ट कंट्रोल्स व्यापार के पुराने नियमों को बदल रहे हैं। इसके अलावा, क्लाइमेट चेंज का असर और डेवलपिंग देशों पर बढ़ता कर्ज भी चिंता का विषय है।
