UNCCD COP17: रेंजलैंड्स के लिए **$1.2 अरब** का बड़ा फंड, क्लाइमेट सेक्टर में दिखेगा असर

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AuthorAditya Rao|Published at:
UNCCD COP17: रेंजलैंड्स के लिए **$1.2 अरब** का बड़ा फंड, क्लाइमेट सेक्टर में दिखेगा असर

मंगोलिया में संपन्न हुए UNCCD COP17 शिखर सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर रेंजलैंड्स को पुनर्जीवित करने के लिए **$1.2 अरब** की बड़ी राशि का ऐलान किया गया है। यह पहल **45** नई परियोजनाओं के माध्यम से भूमि प्रबंधन और सूखे से निपटने पर केंद्रित है।

मंगोलिया के उलानबटार में आयोजित UNCCD की 17वीं कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP17) का समापन 28 अगस्त 2026 को एक बड़ी उपलब्धि के साथ हुआ। वैश्विक समुदाय ने 'रेंजलैंड्स फ्लैगशिप इनिशिएटिव' के लिए $1.2 अरब जुटाए हैं। यह कुल $1.3 अरब के उस बड़े पोर्टफोलियो का हिस्सा है, जिसे भूमि बहाली और सूखा प्रतिरोध (drought resilience) के लिए समर्पित किया गया है।

निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह कोई कॉर्पोरेट इकाई नहीं है और न ही इसके कोई शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं। हालांकि, यह कदम ग्लोबल क्लाइमेट फाइनेंस पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव है। रेंजलैंड्स पृथ्वी की लगभग 54% सतह को कवर करते हैं और सालाना $21 ट्रिलियन से $47 ट्रिलियन के इकोसिस्टम सर्विस में योगदान देते हैं।

भारतीय कंपनियों के लिए अवसर

भारत जैसे देशों के लिए, यह विकास क्लाइमेट रेजिलिएंस और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर की ओर बढ़ते वैश्विक रुझान को दिखाता है। आने वाले समय में, भारतीय कंपनियां जो इरिगेशन टेक्नोलॉजी, पर्यावरण कंसल्टेंसी और सॉइल हेल्थ मॉनिटरिंग में काम करती हैं, उनके लिए अप्रत्यक्ष रूप से नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

इन परियोजनाओं की सफलता 45 अलग-अलग क्षेत्रों में समन्वय और अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं के निरंतर सहयोग पर निर्भर करेगी। निवेशकों को उन भारतीय फर्मों पर नजर रखनी चाहिए जो लैंड रेस्टोरेशन और एग्रीकल्चर सस्टेनेबिलिटी से जुड़े सरकारी टेंडर्स में सक्रिय हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय फंडिंग का असर स्थानीय स्तर पर पॉलिसी में बदलाव के साथ ही दिखाई देगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.