UNCCD COP17: ग्लोबल ड्रॉट फ्रेमवर्क पर नहीं बनी सहमति, पर **$1.3 बिलियन** के फंड का हुआ ऐलान

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AuthorNeha Patil|Published at:
UNCCD COP17: ग्लोबल ड्रॉट फ्रेमवर्क पर नहीं बनी सहमति, पर **$1.3 बिलियन** के फंड का हुआ ऐलान

उलानबातार में संपन्न UNCCD COP17 समिट में ग्लोबल ड्रॉट फ्रेमवर्क पर कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। हालांकि, इस असफलता के बीच **$1.3 बिलियन** के नए फंड और 'Drought Resilience Investment Facility' (DRIF) के लॉन्च ने निवेशकों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं।

मंगोलिया के उलानबातार में आयोजित UNCCD COP17 समिट बिना किसी बाइंडिंग ग्लोबल ड्रॉट फ्रेमवर्क के समाप्त हो गई है। यह लगातार दूसरा मौका है जब प्रतिनिधि किसी कानूनी प्रोटोकॉल को फाइनल करने में विफल रहे हैं, जिसका मुख्य कारण राष्ट्रीय संप्रभुता और स्थानीय नीतियों पर पड़ने वाले असर को लेकर देशों के बीच मतभेद था।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

भले ही ग्लोबल ट्रीटी पर बात नहीं बनी, लेकिन समिट में $1.3 बिलियन की फंडिंग का वादा एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, Drought Resilience Investment Facility (DRIF) का लॉन्च यह दर्शाता है कि अब कैपिटल को जल सुरक्षा और मिट्टी की नमी प्रबंधन जैसे स्पेसिफिक प्रोजेक्ट्स की ओर मोड़ा जा रहा है। अब फोकस ग्लोबल पॉलिसी से हटकर रीजनल और प्रोजेक्ट-बेस्ड अवसरों पर शिफ्ट हो रहा है।

आर्थिक जोखिम और सेक्टर पर असर

आंकड़ों के अनुसार, सूखे के कारण होने वाला आर्थिक नुकसान हर साल 3% से 7.5% की दर से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर सप्लाई चेन और ग्लोबल लॉजिस्टिक्स पर दिख रहा है। पनामा नहर जैसी घटनाओं ने यह साबित किया है कि पानी की कमी से शिपिंग रूट्स बाधित होते हैं और परिचालन लागत (Operational Cost) बढ़ जाती है।

विशेष रूप से एग्रीकल्चर, केमिकल्स और पावर जनरेशन जैसे वॉटर-इंटेंसिव सेक्टर की कंपनियों के लिए आने वाले समय में अनुपालन (Compliance) और लॉजिस्टिक चुनौतियां बनी रहेंगी। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि सरकारें इस फंड को कैसे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्ट्रैक्ट्स में बदलती हैं, क्योंकि अगले COP18 समिट तक सूखा एक मुख्य एजेंडा बना रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.