संयुक्त राष्ट्र (UN) की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। दक्षिण एशिया को वायु प्रदूषण के कारण अपनी वार्षिक GDP का **10%** हिस्सा गंवाना पड़ रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में **25** ऐसे एकीकृत समाधान सुझाए गए हैं, जो निवेश पर **15 गुना** तक आर्थिक लाभ दे सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और Climate and Clean Air Coalition की ताजा असेसमेंट रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया में प्रदूषण से हो रही आर्थिक क्षति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, महीन कणों (fine particulate matter) से होने वाले नुकसान के चलते क्षेत्र की विकास दर पर गंभीर असर पड़ रहा है, जो उत्पादकता पर एक तरह के 'स्थायी टैक्स' की तरह काम कर रहा है।
एकीकृत नीति का आर्थिक गणित
रिपोर्ट केवल पर्यावरणीय चुनौती की बात नहीं करती, बल्कि इसे एक आर्थिक रणनीति के रूप में देखती है। इसमें प्रस्तावित 25 एकीकृत समाधानों पर अगर $1 का निवेश किया जाए, तो यह $15 का आर्थिक लाभ पैदा कर सकते हैं। यह लाभ बेहतर स्वास्थ्य, बढ़ती श्रम उत्पादकता और इन्फ्रास्ट्रक्चर को होने वाले कम नुकसान से आता है। भारत के संदर्भ में, 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (PMUY) को एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है, जो घरेलू प्रदूषण को कम करने में सहायक रही है।
देरी कितनी महंगी?
ग्लोबल स्तर पर निर्णय लेने में देरी के कारण दुनिया हर साल $1.5 ट्रिलियन का नुकसान उठा रही है, जो कि वैश्विक GDP का 0.5% है। रिपोर्ट के अनुसार, जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) पर मिलने वाली सब्सिडी, जो 2022 में वैश्विक GDP का 2.18% थी, पूंजी का गलत आवंटन है जिसे क्लीन एयर प्रोजेक्ट्स में लगाया जा सकता था।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
साफ ऊर्जा की ओर बढ़ना अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि एक फाइनेंशियल जरूरत बन गया है। निवेशकों को उन सरकारी नीतियों पर नजर रखनी चाहिए जो एमिशन स्टैंडर्ड्स और एनर्जी सब्सिडी के युक्तिकरण (rationalization) को प्राथमिकता दे रही हैं। आने वाले समय में क्लीन टेक्नोलॉजी में पूंजी का प्रवाह बढ़ने की पूरी संभावना है।
