UK के नए वीजा नियमों, जिसमें **£41,700** की सैलरी लिमिट तय की गई है, ने प्रोफेशनल टैलेंट की भारत वापसी का रास्ता खोल दिया है। Reliance, Mahindra और Axis Bank जैसे दिग्गज अब इस टैलेंट को हाथों-हाथ ले रहे हैं।
यूके की इमिग्रेशन पॉलिसी में हुए बदलावों ने भारत और ब्रिटेन के बीच लेबर फ्लो को पूरी तरह बदल दिया है। नए नियमों के तहत, स्किल्ड वर्कर वीजा के लिए सालाना सैलरी लिमिट को बढ़ाकर £41,700 कर दिया गया है। साथ ही, अब स्पॉन्सर्ड रोल्स के लिए RQF 6 (डिग्री लेवल) की योग्यता अनिवार्य है। इन कड़े पैमानों के चलते मिड-करियर प्रोफेशनल्स और नए ग्रेजुएट्स के लिए यूके में रहना मुश्किल हो गया है, जिसे इकोनॉमिस्ट 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' का नाम दे रहे हैं।
कंपनियों के लिए बड़ा मौका
भारतीय कॉरपोरेट्स के लिए यह एक सुनहरा मौका है। Reliance Industries, Mahindra Automotive और Axis Bank जैसी बड़ी कंपनियां इस टैलेंट पूल का इस्तेमाल कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाले इन कर्मचारियों को काम पर रखने से कंपनियों को ट्रेनिंग का समय और खर्च बचाने में मदद मिल रही है। निवेशकों के लिए, यह लार्ज-कैप कंपनियों की वर्कफोर्स की क्वालिटी में सुधार और लॉन्ग-टर्म में प्रोडक्टिविटी बढ़ने का संकेत है।
सैलरी का पेच
हालांकि, वापस लौटे प्रोफेशनल्स के लिए भारतीय सैलरी पैकेज एक बड़ा 'रियलिटी चेक' है। यूके के मुकाबले भारत में मिलने वाली सैलरी अक्सर कम होती है, जिसे 'सैलरी कॉम्प्रेशन' कहा जा रहा है। घरेलू बाजार के लिए इस उच्च-कुशल टैलेंट को सही सैलरी पर एडजस्ट करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। कई लोग अपनी उम्मीदों के मुताबिक नौकरी पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार भी कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
निवेशकों को केवल हायरिंग की खबरों पर ही नजर नहीं रखनी चाहिए, बल्कि यह भी देखना होगा कि क्या यह टैलेंट कंपनी की कार्यक्षमता या इनोवेशन में कोई ठोस बदलाव ला रहा है। साथ ही, Reliance और Axis Bank जैसे रिक्रूटर्स के 'वेज बिल' (wage bill) में होने वाले बदलाव भी कंपनी की बैलेंस शीट पर असर डालेंगे।
