Unique Identification Authority of India (UIDAI) अपनी क्षमता को तीन गुना बढ़ाने जा रही है। अब रोजाना 10 करोड़ के मुकाबले 30 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन (Aadhaar Authentication) संभव हो सकेंगे।
डिजिटल बैकबोन को मजबूती
ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल 2026 के दौरान UIDAI के चेयरपर्सन नीलकंठ मिश्रा ने साफ किया है कि अथॉरिटी अपने बैकएंड आर्किटेक्चर को पूरी तरह से अपग्रेड कर रही है। वर्तमान में सिस्टम रोजाना 10 करोड़ ट्रांजेक्शन प्रोसेस करता है, जिसे बढ़ाकर 25 से 30 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते दायरे को देखते हुए यह कदम बेहद अहम है, क्योंकि आज 600 से ज्यादा संस्थाएं आधार के जरिए वेरिफाई हो रही हैं।
नई टेक्नोलॉजी और सुरक्षा पर जोर
UIDAI अब 'इनविजिबल ऑथेंटिकेशन' (Invisible Authentication) की दिशा में कदम बढ़ा रही है, ताकि फिजिकल वेरिफिकेशन की जरूरत खत्म हो सके। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल फ्रॉड पकड़ने के लिए किया जाएगा। साथ ही, अगर ऑथेंटिकेशन फेल होता है, तो अब सिस्टम यूजर्स को स्पष्ट कारण भी बताएगा ताकि परेशानी कम हो सके।
चुनौतियां और भविष्य की राह
इतने बड़े ट्रैफिक को संभालना एक चुनौती है। इसे सुरक्षित बनाने के लिए UIDAI 'जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर' तैयार कर रही है और भविष्य में क्वांटम-कंप्यूटिंग से होने वाले खतरों से निपटने के लिए भी खुद को तैयार कर रही है। इसके अलावा, आधार ऐप के 6 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड्स के साथ, अथॉरिटी 'एजेंटिक एआई' पर भी काम कर रही है, जो अगले 3 वर्षों में बिना मानवीय हस्तक्षेप के यूजर्स के लिए होटल चेक-इन जैसे काम खुद कर सकेगी। हालांकि, इस सब में डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी रहेगी।
