ट्रंप का बड़ा दांव: 10% सरचार्ज लागू, वैश्विक व्यापार में फिर उथल-पुथल

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ट्रंप का बड़ा दांव: 10% सरचार्ज लागू, वैश्विक व्यापार में फिर उथल-पुथल
Overview

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा कदम उठाते हुए आयात पर **10%** का अतिरिक्त सरचार्ज (surcharge) लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, उन्होंने कांग्रेस को दरकिनार करते हुए यह फैसला लिया है, जिससे वैश्विक व्यापारिक संबंधों में फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है।

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एग्जीक्यूटिव पावर का दांव

यह फैसला तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा पहले लगाए गए कुछ टैरिफ को रद्द कर दिया था। इसके जवाब में, ट्रम्प प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल किया है। इस धारा के तहत, राष्ट्रपति भुगतान संतुलन (balance-of-payments) की समस्याओं से निपटने के लिए आयात पर 15% तक का अस्थायी सरचार्ज लगा सकते हैं। खास बात यह है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल पहले कभी नहीं हुआ है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने खुद कहा है कि उन्हें 'टैरिफ पर अतिरिक्त कार्रवाई के लिए कांग्रेस से पूछने की जरूरत नहीं है'। यह व्यापार नीति में कार्यकारी शक्ति का एक मजबूत प्रदर्शन है, जो विधायी निगरानी को दरकिनार करता है।

ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर

मौजूदा 47.5% चीन पर और 50% ब्राजील पर लगे टैरिफ के ऊपर यह नया 10% का सरचार्ज आयातकों और उपभोक्ताओं के लिए लागत को काफी बढ़ा देगा। विश्लेषकों का मानना है कि इससे ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी बाधाएं आ सकती हैं और कंपनियों के लिए माल का आवागमन (sourcing) अधिक जटिल हो सकता है। हालांकि, कनाड़ा और मेक्सिको जैसे कुछ प्रमुख देशों को छूट मिल सकती है, जैसा पहले के टैरिफ के मामले में देखा गया था।

महंगाई और बाजार में अनिश्चितता

अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि यह 10% का सरचार्ज उपभोक्ता कीमतों में लगभग 0.7% की एकमुश्त वृद्धि कर सकता है। यह महंगाई (inflation) को काबू में करने के फेडरल रिजर्व के प्रयासों के लिए एक और चुनौती पेश करेगा। 2018-2019 के ट्रेड वॉर की तरह, इस कदम से बाजार में भी अस्थिरता (volatility) बढ़ने और निवेशकों का भरोसा डगमगाने की आशंका है। JP Morgan Global Research के अनुसार, ऐसे टैरिफ वृद्धि से आर्थिक विकास पर असर पड़ता है और बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव आता है।

आगे का रास्ता

यह कदम व्यापार नीति में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर रहा है। आगे चलकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य देश इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे जवाबी कार्रवाई करते हैं। कानूनी चुनौतियाँ और विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने की संभावना बनी रहेगी, जिससे वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.