ट्रंप की नीति का जोर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर एक साल के लिए 10% की सीमा लगाने की मांग करके एक बहस छेड़ दी। प्रस्तावित उपाय, जो 20 जनवरी से प्रभावी होना है, कार्यान्वयन (implementation) पर विशिष्ट विवरणों का अभाव है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी जनता को अब क्रेडिट कार्ड कंपनियों द्वारा 20% से 30% या उससे अधिक दरें वसूलने पर "ठगा" (ripped off) नहीं जाएगा। उन्होंने इसे "AFFORDABILITY!" (सामर्थ्य!) कहते हुए मौजूदा प्रशासन से तुलना की।
राजनीतिक संदर्भ
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन नवंबर मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाताओं के बीच लोकप्रियता हासिल कर रहे लागत और मूल्य संबंधी चिंताओं पर राष्ट्रपति ट्रंप के फोकस को उजागर करने के प्रयासों को तेज कर रहा है। उपभोक्ता सामर्थ्य पर कार्रवाई दिखाना एक प्रमुख अभियान रणनीति है।
ट्रंप के संदेश से कुछ घंटे पहले, सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी ऐसी ही भावनाएं व्यक्त कीं, हालांकि उन्होंने ट्रंप के पिछले कार्यों की आलोचना की। सैंडर्स ने नोट किया कि ट्रंप ने पहले 10% की दर तय करने का वादा किया था, लेकिन इसके बजाय बड़े बैंकों को विनियमित (deregulate) किया जो 30% तक वसूलते हैं।
उद्योग की चिंताएं
बैंक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (Bank Policy Institute), एक व्यापार समूह, ने पहले भी इसी तरह के विधायी प्रस्तावों पर चिंता व्यक्त की है। पिछले साल एक रिपोर्ट में, संस्थान ने तर्क दिया था कि दरों को सीमित करने का लक्ष्य परिवारों को ऋण में मदद करना है, लेकिन यह अंततः उपभोक्ताओं की क्रेडिट तक पहुंच को नुकसान पहुंचा सकता है।
संस्थान ने कहा, "बैंक कार्ड, अपने अपेक्षाकृत कम न्यूनतम आवश्यक मासिक भुगतानों की वजह से, कई परिवारों के लिए बैकअप लिक्विडिटी (backup liquidity) का एक महत्वपूर्ण और किफायती स्रोत हैं," और यदि सीमाएं लगाई जाती हैं तो क्रेडिट उपलब्धता के लिए संभावित नकारात्मक परिणामों का सुझाव दिया।