मध्य प्रदेश में व्यापारी संगठनों ने UPI पर प्रस्तावित **0.4%** मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। **₹2,000** से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर लगने वाले इस चार्ज को लेकर दुकानदारों में भारी नाराजगी है और वे इसे **15 अक्टूबर** की डेडलाइन से पहले वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों जैसे इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में व्यापारियों ने 23 सितंबर, 2026 को 'नो UPI डे' (No UPI Day) के रूप में विरोध दर्ज कराया। अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जैसे संगठनों के नेतृत्व में दुकानदारों ने अपने QR कोड को काले कपड़ों से ढककर अपनी नाराजगी जाहिर की है। यह विरोध प्रदर्शन छोटे व्यापारियों और सरकार के बीच डिजिटल पेमेंट फ्रेमवर्क को लेकर बढ़ते मतभेद को दर्शाता है।
क्यों है विवाद?
अब तक UPI पूरी तरह से फ्री मॉडल पर काम कर रहा था, जो कि छोटे व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी सुविधा थी। व्यापारियों का तर्क है कि 0.4% का लेवी लगाने से उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा और इससे डिजिटल ट्रांजैक्शन को अपनाने की रफ्तार धीमी हो सकती है। व्यापारियों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि यदि 15 अक्टूबर तक इसे वापस नहीं लिया गया, तो वे अपने डिजिटल पेमेंट हार्डवेयर को हटाने जैसे सख्त कदम उठाने पर मजबूर होंगे।
सरकार का पक्ष और निवेश पर असर
सरकार का कहना है कि UPI इकोसिस्टम को लॉन्ग-टर्म में सस्टेनेबल बनाने के लिए यह जरूरी है। भारी ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत बढ़ गई है और इस चार्ज का बोझ आम ग्राहकों पर नहीं बल्कि मर्चेंट्स पर ही पड़ना है।
निवेशकों के नजरिए से यह एक अहम घटना है। यदि यह पॉलिसी लागू होती है, तो पेमेंट वैल्यू चेन में शामिल कंपनियों के लिए यह कमाई का नया जरिया बन सकती है। हालांकि, व्यापारियों के भारी विरोध के कारण डिजिटल पेमेंट वॉल्यूम में कमी आने का जोखिम भी बना हुआ है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या सरकार और व्यापारियों के बीच कोई बीच का रास्ता निकलता है या डिजिटल पेमेंट का गणित बदलने वाला है।
