Quality Control Rules: व्यापार विशेषज्ञों की मांग, सख्त नियमों में हो बदलाव, MSME पर बढ़ रहा दबाव

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AuthorAditya Rao|Published at:
Quality Control Rules: व्यापार विशेषज्ञों की मांग, सख्त नियमों में हो बदलाव, MSME पर बढ़ रहा दबाव

भारत के अनिवार्य क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स (QCO) को लेकर एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है। साल 2016 में जहां केवल **70** प्रोडक्ट्स इन नियमों के दायरे में थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर **790** तक पहुंच गई है, जिससे छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

नियम बनाम हकीकत

Bureau of Indian Standards (BIS) के तहत आने वाले ये कड़े नियम सुरक्षा और क्वालिटी के लिए लाए गए थे, लेकिन अब ये सप्लाई चेन के लिए बड़ी बाधा बन रहे हैं। बड़ी कंपनियों के मुकाबले छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए प्रोडक्ट टेस्टिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव देरी का खर्च उठाना नामुमकिन सा होता जा रहा है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

विदेशी निवेश पर असर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी आलोचना हो रही है। Japan External Trade Organization (JETRO) के सर्वे के मुताबिक, भारत में काम कर रही 72% जापानी कंपनियों ने सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को अपने कामकाज के लिए बड़ा रिस्क बताया है। अगर यह प्रक्रिया सरल नहीं हुई, तो विदेशी निवेश (FDI) पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

सरकार का रुख

बढ़ते दबाव को देखते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि सरकार हाई-टेक सेक्टर के लिए नियमों में ढील देने की योजना बना रही है। जून 2026 में जारी 'ट्रांजिशन फैसिलिटेशन (क्वालिटी कंट्रोल) ऑर्डर, 2026' इसी दिशा में एक कदम है, जो कुछ उत्पादों के लिए कमेटी-आधारित कंप्लायंस का रास्ता खोलता है।

निवेशकों के लिए संकेत

निवेशकों को अब यह देखना होगा कि ये नई और सरल व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है। यदि सरकार इस क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम की व्यवस्थित समीक्षा करती है, तो इससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम होगी और निर्यात मार्जिन (Export Margins) में सुधार देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.