Thomas Cook India की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) से विदेशी मुद्रा (Forex) की मांग में भारी उछाल आया है, जो अब कुल मांग का **53%** हो गया है। हालांकि, कंपनी के Q1 FY27 के नतीजे मिले-जुले रहे, जहां समेकित आय (**consolidated income**) **12%** घटकर **₹21.53 अरब** पर आ गई।
छोटे शहरों से Forex की बढ़ती मांग
Thomas Cook India की 'India Forex Report 2026' बताती है कि अब विदेशी मुद्रा की मांग सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से 53% फॉरेक्स ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, जबकि टियर-1 शहरों का हिस्सा 47% रह गया है। यह दिखाता है कि छोटे शहरों के लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ी है और उनके यात्रा करने की इच्छाएं भी बढ़ी हैं।
यात्रा की मांग और युवा
फिलहाल, 57% फॉरेक्स ट्रांजैक्शन सिर्फ घूमने-फिरने (leisure travel) के लिए हो रहे हैं, जबकि 27% कॉरपोरेट यात्राओं के लिए और 16% छात्र वीजा के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि 25 से 60 साल की उम्र के मिलेनियल्स और Gen X, यानी युवा पीढ़ी, कुल मांग का लगभग 75% हिस्सा चला रही है।
आय में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव
इस भौगोलिक बदलाव के बीच, कंपनी के वित्तीय नतीजों पर नजर डालें तो Q1 FY27 में Thomas Cook India का मुनाफा ₹71.90 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले मामूली 0.21% कम है। चिंता की बात यह है कि कंपनी की समेकित आय (consolidated total income) 12% घटकर ₹21.53 अरब हो गई।
कंपनी का कहना है कि मध्य पूर्व (Middle East) और GCC क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण प्रदर्शन पर दबाव पड़ा है। खासकर, डेजर्ट एडवेंचर्स (Desert Adventures) और DEI जैसी सहायक कंपनियों का इन क्षेत्रों में बड़ा एक्सपोजर होने के कारण, हवाई क्षेत्र में आई रुकावटों का असर कंपनी की आय पर पड़ा है।
डिजिटल पर फोकस और आगे की राह
इन चुनौतियों से निपटने के लिए, कंपनी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर जोर दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म से होने वाले फॉरेक्स ट्रांजैक्शन 25% तक पहुंच गए हैं, और DIY (Do-It-Yourself) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल 50% बढ़ा है। हालांकि, अभी भी 75% ट्रांजैक्शन ब्रांच के जरिए ही हो रहे हैं।
निवेशकों के लिए, आगे चलकर मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक जोखिमों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, यह देखना भी जरूरी है कि डिजिटल अपनाने की बढ़ती गति और छोटे शहरों में विस्तार, मौजूदा आय दबाव को कितनी हद तक कम कर पाते हैं।
