तेलंगाना सरकार ने अपनी नई 'Telangana Rising 2047' विजन पेश की है, जिसके तहत राज्य को 2034 तक **$1 ट्रिलियन** की इकॉनमी बनाने का टारगेट रखा गया है। इस प्लान का मुख्य आधार शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट है, लेकिन इसकी कामयाबी राज्य के फिसकल हेल्थ और कर्ज प्रबंधन पर टिकी है।
तेलंगाना सरकार ने औपचारिक रूप से 'Telangana Rising 2047' रोडमैप का अनावरण किया है। इसका मकसद राज्य को 2034 तक $1 ट्रिलियन और 2047 तक $3 ट्रिलियन की इकॉनमी बनाना है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य का फोकस मानव पूंजी (human capital) के विकास पर होगा।
शिक्षा और स्किल्स बनेंगे ग्रोथ इंजन
सरकार ने शिक्षा के लिए बजट आवंटन को कुल बजट का 15% तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। अगर तुलना करें, तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के बजट में ₹23,729 करोड़ आवंटित किए गए थे, जो कुल बजट का करीब 7.78% था। इस हिस्से को दोगुना करने का मतलब है कि सरकार शिक्षा को खर्च नहीं, बल्कि भविष्य के निवेश के रूप में देख रही है। इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए 'Young India Skills University' की भी शुरुआत की गई है, जो Gen Z और नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक के हिसाब से तैयार करेगी।
फिस्कल मैनेजमेंट की चुनौतियां
यह विजन जितना महत्वाकांक्षी है, उतनी ही चुनौतियां भी हैं। सरकार ने पिछले 32 महीनों में ₹3,488 करोड़ के बकाए ट्यूशन फीस का भुगतान किया है, लेकिन बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए और अधिक फंड की जरूरत होगी। सबसे बड़ी चिंता GSDP के मुकाबले कर्ज (debt) के अनुपात को संतुलित रखने की है। विश्लेषकों का मानना है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और सोशल वेलफेयर के बीच तालमेल बिठाना सरकार के लिए एक कठिन परीक्षा होगी।
निवेशकों की नजर कहां है?
निवेशक अब यह देख रहे हैं कि सरकार इन वादों को जमीन पर कैसे उतारती है। निजी कॉलेजों के वित्तीय कामकाज की विजिलेंस जांच और गवर्नेंस को कड़ा करने के कदम यह बताते हैं कि सरकार पारदर्शिता पर जोर दे रही है। आगे चलकर बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर और वर्कफोर्स में सुधार की गति ही इस विजन की सफलता तय करेगी।
