Telangana के मुख्यमंत्री Revanth Reddy ने सूखे के हालात से निपटने के लिए इमरजेंसी प्लान लागू कर दिया है। राज्य में बारिश में **17%** की कमी दर्ज की गई है, जिससे **200** से ज्यादा मंडल प्रभावित हुए हैं। सरकार अब केंद्र से **₹20,000 करोड़** के राहत पैकेज की मांग कर रही है, जिसका असर ग्रामीण मांग और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।
सूखे का साया और सरकार का एक्शन प्लान
तेलंगाना में El Niño के असर के कारण हालात चिंताजनक बने हुए हैं। राज्य के करीब 215 से 235 मंडलों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार को ₹20,000 करोड़ की विशेष सहायता के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। राज्य प्रशासन का मुख्य जोर अब खड़ी फसलों को बचाने और बिजली ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने पर है।
पावर और इंडस्ट्री पर पड़ेगा असर
बिजली और पानी की खपत पर सरकार की पैनी नजर है। उद्योगों और उपभोक्ताओं को बिजली का सीमित उपयोग करने की सलाह दी गई है। अगर आने वाले दिनों में पावर उपलब्धता कम होती है, तो कई एनर्जी-इंटेंसिव गतिविधियों को टालना पड़ सकता है। निवेशकों के लिए यह स्थिति ऑपरेशनल अनिश्चितता बढ़ा सकती है, क्योंकि पावर सप्लाई में कटौती से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है।
कृषि और ग्रामीण मांग पर दबाव
सूखे की मार सीधे तौर पर कृषि उत्पादन पर पड़ रही है। वाटर स्ट्रेस के कारण फसलों को भारी नुकसान होने का अंदेशा है। ऐसे में एग्री-इनपुट, ट्रैक्टर और कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि किसानों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम होने से ग्रामीण बाजार में मांग घटने का रिस्क है।
फिस्कल हेल्थ पर क्या है असर?
राहत पैकेज की यह भारी-भरकम मांग राज्य की वित्तीय सेहत पर भी सवाल खड़े करती है। एक तरफ सूखा राहत और दूसरी तरफ विकास कार्यों का खर्च, इन दोनों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। 12 अक्टूबर, 2026 को राज्य मंत्रियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें MGNREGA के विस्तार जैसे कदमों पर चर्चा होगी। निवेशकों को सरकार की अगली गाइडलाइंस पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि वे राज्य की आर्थिक तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
