तेलंगाना इस समय जल संकट और बिजली की भारी मांग से जूझ रहा है। एल नीनो (El Niño) के असर के चलते राज्य में बिजली की खपत **5,000 MW** बढ़ गई है। सरकार ने किसानों से धान की खेती कम करने को कहा है, जिसका असर रूरल डिमांड और महंगाई पर पड़ सकता है।
पानी का संकट और कृषि पर असर
राज्य में बारिश की 23% कमी के कारण बांधों में पानी का स्तर काफी गिर गया है। वर्तमान में राज्य के पास 209 TMC पानी है, जबकि रबी सीजन (Yasangi) के लिए 460 TMC की जरूरत थी। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता फिलहाल पीने का पानी है। यदि बड़े पैमाने पर धान की खेती जारी रहती है, तो लगभग 10 लाख एकड़ में फसल खराब होने का डर है। कृषि गतिविधियों में कमी का सीधा असर फर्टिलाइजर और बीज बनाने वाली कंपनियों की बिक्री पर पड़ सकता है, जिससे खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़ने की आशंका है।
पावर ग्रिड पर भारी दबाव
ऊर्जा क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक है। गुरुवार को पीक पावर डिमांड 20,003 MW पर पहुंच गई, जबकि अक्टूबर के लिए अनुमान महज 15,000 MW था। यह 5,000 MW का अंतर सरकार के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि फसलों को बचाने के लिए अब महंगे दामों पर ओपन मार्केट से बिजली खरीदी जा रही है। ऐसी ही स्थिति कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे पड़ोसी राज्यों में भी देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण लगभग 30 लाख कृषि पंप सेटों का एक साथ चलना है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
अगले 8 से 10 महीनों तक निवेशकों को इस स्थिति पर नज़र रखनी होगी। ओपन मार्केट से महंगी बिजली खरीदने का सीधा बोझ राज्य की डिस्काम्स (Discoms) की बैलेंस शीट पर पड़ेगा। इसके अलावा, यदि जलाशयों में पानी का स्तर और गिरता है, तो उद्योगों को मिलने वाली पानी की सप्लाई में कटौती की जा सकती है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है।
