El Nino के चलते सूखे के बढ़ते खतरों को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। डिप्टी सीएम भट्टी विक्रमार्क की अध्यक्षता में जल संरक्षण और कृषि चुनौतियों पर चर्चा होगी। इसका सीधा असर रूरल डिमांड और पावर सेक्टर पर पड़ सकता है, जिस पर मार्केट की पैनी नजर है।
तेलंगाना प्रशासन बुधवार को डॉ. बीआर अंबेडकर तेलंगाना राज्य सचिवालय में एक आपातकालीन सर्वदलीय बैठक करने जा रहा है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य El Nino के कारण पैदा हुए सूखे के हालात से निपटने के लिए आम सहमति बनाना है। डिप्टी सीएम भट्टी विक्रमार्क इस चर्चा का नेतृत्व करेंगे, जिसमें पानी के मैनेजमेंट और कृषि क्षेत्र को सहारा देने पर जोर दिया जाएगा।\n\n### रूरल डिमांड और अन्य सेक्टर्स पर असर\n\nनिवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता ग्रामीण मांग (Rural Demand) में सुस्ती है। अगर बारिश की कमी से कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, तो किसानों की आय कम हो जाती है। इसका सीधा असर FMCG, टू-व्हीलर कंपनियों और ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनियों पर पड़ता है। जब किसान की आय अनिश्चित होती है, तो वे गैर-जरूरी खर्च कम कर देते हैं, जो इन कंपनियों के तिमाही नतीजों को 10% से 15% तक प्रभावित कर सकता है।\n\n### बिजली और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दबाव\n\nसूखे के दौरान सिंचाई पंपों का उपयोग अचानक बढ़ जाता है, जिससे राज्य के बिजली वितरण नेटवर्क पर भारी दबाव पड़ता है। बिजली की भारी मांग के कारण राज्य के बिजली बोर्डों की लागत बढ़ सकती है। यदि सरकार को सिंचाई के लिए बिजली की सप्लाई बढ़ानी पड़ती है, तो औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर के लिए बिजली की कटौती हो सकती है, जो मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों पर असर डालती है।\n\n### फसलों में बदलाव और एग्री-इनपुट्स\n\nसरकार किसानों को कम पानी वाली फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। यह रणनीति कृषि-रसायन (Agri-chemicals) और उर्वरक (Fertilizer) कंपनियों के लिए गेम चेंजर हो सकती है। फसलों का पैटर्न बदलने से बीज, खाद और कीटनाशकों की मांग के समीकरण बदल जाएंगे।\n\nआने वाले हफ्तों में सरकार द्वारा घोषित राहत कोष और जलाशय के स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। राज्य कितनी कुशलता से जल उपलब्धता का प्रबंधन करता है, यही आने वाले समय में आर्थिक स्थिरता तय करेगा।
