Telangana, AP में बंपर रूरल जॉब ग्रोथ, देश भर में 'Viksit Bharat' मिशन के तहत रोजगार 56% गिरा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Telangana, AP में बंपर रूरल जॉब ग्रोथ, देश भर में 'Viksit Bharat' मिशन के तहत रोजगार 56% गिरा

देशभर में 'विक्सित भारत – गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (VB-G RAM G) के तहत रोज़गार सृजन में 56% की भारी गिरावट आई है। ऐसे में, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इस नए मिशन के तहत रोज़गार में ज़बरदस्त उछाल देखा गया है, जो राष्ट्रीय आंकड़ों से बिलकुल अलग है।

रूरल जॉब मार्केट में आया बड़ा मोड़

भारत के ग्रामीण रोज़गार परिदृश्य में एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। 'विक्सित भारत – गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (VB-G RAM G), जिसने 1 जुलाई 2026 को MGNREGA की जगह ली है, की शुरुआत राष्ट्रीय स्तर पर थोड़ी मुश्किल भरी रही है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में, देश भर में रोज़गार (पर्सन-डेज़ में मापा गया) में कुल 56% की भारी गिरावट आई है।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश बने 'आउटलायर'

इस व्यापक गिरावट के बीच, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश स्पष्ट रूप से अलग खड़े नज़र आ रहे हैं। तेलंगाना में रोज़गार सृजन में 135% का उछाल दर्ज किया गया, जो हाल की अवधि में 36.99 लाख पर्सन-डेज़ तक पहुंच गया। वहीं, आंध्र प्रदेश ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और 54% की बढ़ोतरी के साथ लगभग 1.39 करोड़ पर्सन-डेज़ दर्ज किए। इन राज्यों ने अपने रोज़गार के आंकड़ों को बनाए रखने या बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है, जबकि कई अन्य राज्यों में दोहरे अंकों में गिरावट देखी गई है।

नई फंडिंग के नियम: क्या है असर?

इस अंतर का मुख्य कारण नए मिशन द्वारा लाए गए संरचनात्मक बदलाव हैं। VB-G RAM G प्रोग्राम में 60:40 का केंद्र-राज्य फंडिंग मॉडल पेश किया गया है। इसका मतलब है कि राज्यों को अब 40% फंडिंग का योगदान देना होगा, जो पिछले MGNREGA ढांचे से एक बड़ा बदलाव है, जिसे पूरी तरह से केंद्र सरकार फंड करती थी। इस बदलाव से राज्य के बजट पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ा है, जो शायद इस बात को प्रभावित कर रहा है कि अलग-अलग राज्य कितनी तेज़ी से और प्रभावी ढंग से कार्यक्रम लागू कर पा रहे हैं।

ट्रांज़िशन की चुनौतियाँ और पॉलिसी में बदलाव

राष्ट्रीय स्तर पर आई यह भारी गिरावट ट्रांज़िशन (संक्रमण) की मुश्किलों से भी जुड़ी है। एक बड़े रोज़गार ढांचे से दूसरे में जाना जटिल सिस्टम माइग्रेशन की मांग करता है, जिससे कार्यान्वयन में अस्थायी, लेकिन गंभीर, देरी हो सकती है। इसके अतिरिक्त, नए मिशन में कृषि के चरम मौसमों के दौरान 60 दिनों की अनिवार्य 'पॉज़' अवधि भी शामिल है। यह नियम खेती के लिए मज़दूरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, लेकिन यह यह भी सीमित करता है कि व्यक्ति कार्यक्रम के तहत कब काम का दावा कर सकते हैं।

जिन राज्यों ने अभी तक इन नए, सख्त नियमों के अनुसार अपने प्रशासनिक प्रणालियों को पूरी तरह से अनुकूलित नहीं किया है, वे रोज़गार में भारी कमी देख रहे हैं। राज्यों के बीच प्रदर्शन का अंतर बताता है कि बेहतर ढंग से तैयार कार्यान्वयन मशीनरी वाले राज्य दूसरों की तुलना में ट्रांज़िशन को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर रहे हैं।

विश्लेषकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस 60:40 फंडिंग मॉडल की स्थिरता कैसी रहती है। यदि राज्य बढ़े हुए वित्तीय बोझ को प्रबंधित करने में संघर्ष करते हैं, तो इससे रोज़गार सृजन में और भी असमान परिणाम सामने आ सकते हैं। राज्य सरकारों की इन कार्यान्वयन बाधाओं को दूर करने की क्षमता यह निर्धारित करेगी कि आने वाले महीनों में राष्ट्रीय रुझान में सुधार होता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.