Tata Steel के CEO T V Narendran ने भारतीय कंपनियों को आगाह किया है। उनका मानना है कि ग्लोबल जोखिमों से निपटने के लिए कंपनियों को केवल लागत कम करने (cost efficiency) के बजाय अब सप्लाई चेन को मजबूत (resilience) बनाने पर फोकस करना होगा।
Tata Steel के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर T V Narendran ने भारतीय कंपनियों के लिए नए दौर का रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने जोर दिया है कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं को देखते हुए, पुरानी कार्यप्रणाली—जो केवल एफिशिएंसी पर टिकी थी—अब काफी नहीं है।
रेजिलिएंस है नई रणनीति
Narendran का कहना है कि आज के अस्थिर दौर में ग्लोबल सप्लाई चेन का लचीला होना बेहद जरूरी है। पहले कंपनियां लागत कम करने के लिए दुनिया के सबसे सस्ते सोर्सिंग सेंटर्स पर निर्भर रहती थीं, लेकिन अब यह रणनीति जोखिम भरी हो गई है। इसका मतलब यह है कि कंपनियों को अब लंबी अवधि की स्थिरता के लिए थोड़ी अधिक ऑपरेशनल लागत को स्वीकार करना पड़ सकता है, ताकि प्रोडक्शन में कोई रुकावट न आए।
वैल्यू चेन और टेक्नोलॉजी पर दांव
भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8% की ग्रोथ और 11.9% के निवेश उछाल के साथ शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन Narendran ने चेताया है कि आगे बढ़ने के लिए सिर्फ वॉल्यूम बढ़ाना काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि:
- IP और टेक्नोलॉजी: कंपनियों को डिजाइन, इंजीनियरिंग और खुद की टेक्नोलॉजी पर मालिकाना हक (ownership) विकसित करना होगा।
- स्किल डेवलपमेंट: भारत की युवा आबादी का तभी फायदा है, जब वे टेक्नोलॉजी-इंटेंसिव क्षेत्रों में कुशल हों।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि Tata Steel अपनी कैपेसिटी विस्तार और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी के बीच संतुलन कैसे बनाती है। जो कंपनियां ट्रेनिंग और R&D में भारी निवेश कर रही हैं, वे भविष्य की मार्केट वोलेटिलिटी (volatility) को बेहतर तरीके से संभाल पाएंगी।
