Tata Steel के CEO की बड़ी सीख: असेंबली से आगे बढ़ेगा भारत, तभी बढ़ेगी निवेशकों की वेल्थ

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AuthorNeha Patil|Published at:
Tata Steel के CEO की बड़ी सीख: असेंबली से आगे बढ़ेगा भारत, तभी बढ़ेगी निवेशकों की वेल्थ

Tata Steel के CEO T.V. Narendran का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लंबी रेस के लिए भारत को सिर्फ 'असेंबली' तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने प्रोप्राइटरी इंजीनियरिंग और मजबूत सप्लाई चेन को भविष्य की मुनाफे वाली रणनीति बताया है।

T.V. Narendran, जो Tata Steel के CEO और All India Management Association के प्रेसिडेंट हैं, ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश किया है। नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन 2026 में बोलते हुए उन्होंने साफ कहा कि भारत में प्रोडक्शन हब बनने का उत्साह तो है, लेकिन असली सफलता तब मिलेगी जब हम केवल 'असेंबली' न करके प्रोप्राइटरी इंजीनियरिंग पर काम करेंगे।

हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग क्यों है जरूरी?

निवेशकों के नजरिए से Narendran की बात बहुत अहम है। जो कंपनियां सिर्फ पुर्जों को जोड़कर (Assembly) माल तैयार करती हैं, वे अक्सर प्राइस वॉर और कम मार्जिन के जाल में फंस जाती हैं। वहीं, जिन कंपनियों के पास खुद का डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी होती है, उनके पास बेहतर प्राइसिंग पावर और मजबूत मार्जिन होता है। Tata Steel जैसी कंपनियां अब इसी बदलाव की ओर देख रही हैं ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन में उनकी पैठ गहरी हो सके।

ग्लोबल रिस्क और सप्लाई चेन का चैलेंज

Narendran ने बदलते वैश्विक माहौल पर भी चिंता जताई। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण फ्रेट रेट्स और इंश्योरेंस कॉस्ट में आए अचानक उछाल ने बड़ी कंपनियों के प्रॉफिट पर असर डाला है। Tata Steel जैसी कंपनियों के लिए रॉ मटेरियल का आयात और फिनिश्ड गुड्स का निर्यात बेहद जरूरी है, ऐसे में 'जस्ट-इन-टाइम' मॉडल के बजाय अब सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना और लॉजिस्टिक्स पर अपना कंट्रोल बढ़ाना कंपनी की प्राथमिकता है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

मौजूदा दौर में रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ट्रेड बैरियर्स के बीच कंपनियां दबाव में हैं। JSW Steel और Steel Authority of India जैसे अन्य खिलाड़ी भी अपनी क्षमता बढ़ाने में जुटे हैं, लेकिन मार्केट अब यह देख रहा है कि कौन सी कंपनी हाई-वैल्यू स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है। आने वाले समय में निवेशक इस बात पर नजर रखें कि कंपनियां रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में कितना निवेश कर रही हैं और उनकी रेवेन्यू मिक्स में स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी कितनी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.