Tata Sons अब अपनी सब्सिडियरी कंपनियों का विलय करके RBI के 'अपर लेयर' NBFC दर्जे से बाहर निकलने की योजना बना रही है, ताकि अनिवार्य लिस्टिंग से बचा जा सके। वहीं, कॉर्पोरेट जगत में Anupam Rasayan ने Bliss GVS Pharma में हिस्सेदारी खरीदी और इंफ्रा सेक्टर में NCC व IRFC को बड़े प्रोजेक्ट मिले हैं।
Tata Sons का बड़ा दांव
Tata Sons अपनी सब्सिडियरी कंपनियों, जैसे Tata Electronics Systems Solutions और Tata Consulting Engineers का पैरेंट कंपनी में विलय करने पर विचार कर रही है। इस कवायद का मुख्य मकसद RBI के 'अपर लेयर' NBFC फ्रेमवर्क से खुद को बाहर निकालना है। साल 2022 में RBI ने इसे 'सिस्टमैटिकली इंपॉर्टेंट' मानते हुए यह टैग दिया था, जिसके चलते कंपनी के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य हो गया था। कंपनी इस अनिवार्य लिस्टिंग से बचने की कोशिशों में जुटी है, लेकिन RBI की मंजूरी इस पूरे प्लान की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगी। निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम काफी अहम है क्योंकि Tata Sons, TCS, Tata Motors और Tata Steel जैसी दिग्गज कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखती है।
कॉरपोरेट जगत की हलचल
- Anupam Rasayan: कंपनी ने Bliss GVS Pharma में 48.2% हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। इसके लिए ₹299 प्रति शेयर की कीमत तय की गई थी, जिससे कंपनी अब फिनिश्ड डोजेज फॉर्मूलेशन (Finished Dosage Formulations) के क्षेत्र में कदम रख रही है।
इंफ्रा सेक्टर में नए ऑर्डर्स की बौछार
- IRFC: कंपनी ने Damodar Valley Corporation के साथ रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए ₹4,200 करोड़ का फाइनेंसिंग एग्रीमेंट साइन किया है।
- NCC Limited: आंध्र प्रदेश सरकार से पीने के पानी की योजना के लिए ₹1,076.71 करोड़ का ठेका मिला है।
- Power Mech Projects: तेलंगाना पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन से ₹279.20 करोड़ का ऑपरेशन और मेंटेनेंस ऑर्डर हासिल हुआ है।
- Ellenbarrie Industrial Gases: कंपनी को BHEL की ओर से ₹481 करोड़ का बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ है।
