Tata Sons के बोर्ड ने Bombay House में एक अहम बैठक की है। इसमें चेयरमैन N. Chandrasekaran के फरवरी 2027 में पद छोड़ने और RBI की गाइडलाइंस के तहत कंपनी की अनिवार्य लिस्टिंग को लेकर रणनीति बनाई जा रही है।
लीडरशिप में बदलाव की तैयारी
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के बोर्ड ने Bombay House में एक महत्वपूर्ण बैठक की। चेयरमैन N. Chandrasekaran के फरवरी 2027 में पद से हटने की पुष्टि के बाद, बोर्ड अब एक ऐसे उत्तराधिकारी की तलाश में है जो इतने बड़े और जटिल बिजनेस साम्राज्य को संभाल सके। यह ग्रुप के लिए एक नाजुक समय है क्योंकि कंपनी एविएशन और डिजिटल जैसे नए क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रही है।
RBI की सख्ती और IPO का दबाव
लीडरशिप के अलावा, बोर्ड के सामने RBI का एक बड़ा रेगुलेटरी दबाव भी है। Tata Sons को 'अपर लेयर एनबीएफसी' (Upper Layer NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसके चलते इसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। लगभग ₹17.2 लाख करोड़ की वैल्यूएशन वाली इस कंपनी का IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इवेंट साबित हो सकता है।
चुनौतियां और वैल्यूएशन
एक होल्डिंग कंपनी होने के नाते, Tata Sons की असली वैल्यू ग्रुप की अन्य लिस्टेड कंपनियों (जैसे TCS और Tata Motors) में हिस्सेदारी से आती है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस 'होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट' की वजह से लिस्टिंग के समय सही वैल्यूएशन तय करना मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। बोर्ड में शामिल Noel Tata और CFO Saurabh Agrawal जैसे दिग्गजों के लिए ऑपरेशनल स्टेबिलिटी बनाए रखना अब प्राथमिकता बनी हुई है।
