Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran ने बड़ा ऐलान किया है। उनका मानना है कि AI और टेक्नोलॉजी की ताकत पर भारत मल्टी-डिकेड ग्रोथ की राह पर है। ग्रुप ने सेमीकंडक्टर्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में बड़े दांव लगाए हैं, हालांकि निवेशकों को मुनाफे के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
टेक्नोलॉजी और AI का दौर
Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran का मानना है कि भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ का अगला अध्याय पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक टेक्नोलॉजी से लिखा जाएगा। एक यूनिवर्सिटी इवेंट में बोलते हुए उन्होंने साफ किया कि नई टेक्नोलॉजी नए इंडस्ट्रीज को जन्म दे रही है, जो भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल देगी।
ग्रुप की बदली हुई रणनीति
टाटा ग्रुप अब अपनी पूरी ताकत हाई-ग्रोथ और टेक्नोलॉजी-आधारित सेक्टर्स पर लगा रहा है। Tata Neu जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के अलावा, कंपनी का फोकस सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी पर है। खास तौर पर धोलेरा (Dholera) में लग रहा सेमीकंडक्टर प्लांट इस दिशा में एक बड़ा कदम है।
निवेशकों के लिए रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह विजन बड़ा है, लेकिन इसमें रिस्क भी कम नहीं है। ये सभी प्रोजेक्ट्स 'कैपिटल-इंटेंसिव' हैं, यानी इनमें भारी-भरकम शुरुआती निवेश की जरूरत होती है। मुनाफा रातों-रात नहीं, बल्कि कई वर्षों के बाद आता है।
Reliance Industries की तरह ही टाटा भी अपने ट्रेडिशनल बिजनेस से आगे बढ़कर नए सेक्टर्स में जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। निवेशकों को सलाह है कि वे सिर्फ मैक्रो-इकोनॉमिक खबरों पर न जाएं, बल्कि कंपनी के इन प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन और कर्ज के स्तर (Debt level) पर बारीकी से नजर रखें। असली इम्तिहान यह होगा कि क्या ये नए निवेश, खर्च किए गए पैसे से बेहतर रिटर्न दे पाएंगे या नहीं।
