Tata Sons ने अपनी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) को **31 दिसंबर, 2026** तक के लिए टाल दिया है। यह देरी Sir Ratan Tata Trust से जुड़े गवर्नेंस विवाद के कारण हुई है, जिसके चलते कंपनी की लीडरशिप और सक्सेशन प्लानिंग पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
AGM क्यों टालनी पड़ी?
कंपनी के इतिहास में यह पहली बार है जब AGM को इस तरह टालना पड़ा है। इसकी मुख्य वजह Tata Sons के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का आर्टिकल 86 है। इसके तहत AGM के लिए Sir Ratan Tata Trust (SRTT) और Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) दोनों की तरफ से संयुक्त रूप से नामांकित प्रतिनिधि का होना अनिवार्य है। वर्तमान में, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की जांच के कारण SRTT बोर्ड मीटिंग्स नहीं कर सकता, जिससे कोरम (Quorum) पूरा करना नामुमकिन हो गया है।
क्या है फाइनेंशियल असर?
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने साल के अंत तक का समय दिया है, लेकिन इस डेडलॉक के कारण कंपनी अभी अपने फाइनेंशियल अकाउंट्स और डिविडेंड को आधिकारिक रूप से मंजूरी नहीं दे पा रही है। इससे ग्रुप की टॉप-लेवल गवर्नेंस पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लीडरशिप सक्सेशन पर अनिश्चितता
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब चेयरमैन N. Chandrasekaran ने स्पष्ट कर दिया है कि फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद वे दोबारा इस पद के लिए दावेदारी पेश नहीं करेंगे। AGM में ही कंपनी की भविष्य की रणनीतियों और नेतृत्व के उत्तराधिकार पर चर्चा होनी थी, लेकिन मीटिंग टलने से एक तरह का वैक्यूम पैदा हो गया है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों की नजर अब पूरी तरह से इस बात पर है कि SRTT अपने बोर्ड फंक्शन को कब फिर से शुरू कर पाएगा। जब तक ट्रस्ट के अंदर का यह रेगुलेटरी मसला हल नहीं होता, तब तक कंपनी के फाइनेंशियल अप्रूवल और सक्सेशन प्लान ठंडे बस्ते में रहेंगे।
