तमिलनाडु सरकार ने पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर और सोशल वेलफेयर के लिए **₹79,219 करोड़** के भारी-भरकम खर्च का ऐलान किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य पर **₹13 लाख करोड़** से ज्यादा का कर्ज है, जिसे लेकर इकोनॉमिस्ट और इन्वेस्टर्स सतर्क हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव
तमिलनाडु सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए ₹79,219 करोड़ का बड़ा पैकेज जारी किया है। इस फंड में से ₹33,066 करोड़ की बड़ी राशि नए पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए आवंटित की गई है, जबकि थूथुकुडी सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट के लिए ₹20,800 करोड़ रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि इन कैपिटल इन्वेस्टमेंट को अगले 5 साल में चरणों में पूरा किया जाएगा ताकि कैश फ्लो पर एक साथ बोझ न पड़े।
कर्ज का जाल और वित्तीय चिंताएं
यह खर्च ऐसे वक्त में आया है जब राज्य के वित्तीय आंकड़े चिंताजनक बने हुए हैं। जून 2026 की व्हाइट पेपर रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल देनदारी ₹13.18 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के बजट अनुमानों में ₹55,775 करोड़ का रेवेन्यू डेफिसिट और ₹1,21,819 करोड़ का फिस्कल डेफिसिट रहने की आशंका जताई गई है। ब्याज भुगतान में ही राज्य का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है, जिससे विकास कार्यों के लिए गुंजाइश कम बची है।
क्या है रास्ता?
इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने दिग्गज अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया की अध्यक्षता में एक इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल बनाई है। काउंसिल का लक्ष्य टैक्स कलेक्शन को बेहतर बनाना और रेवेन्यू जुटाने के नए तरीके ढूंढना है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सरकार इन प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से लागू करती है और क्या वह अपनी कर्ज और GSDP रेश्यो को कंट्रोल में रख पाती है या नहीं।
