Annual Survey of Industries 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, Tamil Nadu देश का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनकर उभरा है। राज्य में कुल **41,221** रजिस्टर्ड फैक्ट्रीज हैं, लेकिन Gross Value Added (GVA) के मामले में यह महाराष्ट्र और गुजरात से पीछे है।
भारत के मैन्युफैक्चरिंग मैप पर Tamil Nadu ने अपना दबदबा कायम रखा है। नए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 41,221 रजिस्टर्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जो इसे पूरे देश में नंबर 1 पर लाता है। इस दौड़ में तमिलनाडु ने गुजरात (33,084 यूनिट्स) और महाराष्ट्र (27,379 यूनिट्स) को काफी पीछे छोड़ दिया है।
GVA और मैन्युफैक्चरिंग की असल तस्वीर
भले ही यूनिट्स की संख्या में तमिलनाडु टॉप पर है, लेकिन अगर हम Gross Value Added (GVA) की बात करें तो स्थिति थोड़ी अलग है। तमिलनाडु का भारत के मैन्युफैक्चरिंग GVA में योगदान 10.90% है, जो पिछले आंकड़ों के 10.26% से बेहतर हुआ है। फिर भी, GVA की रैंकिंग में राज्य अभी भी महाराष्ट्र और गुजरात के बाद तीसरे पायदान पर है। इसका मतलब साफ है कि राज्य में फैक्ट्रीज तो बहुत हैं, लेकिन उन यूनिट्स से पैदा होने वाली वैल्यू अभी भी बड़े कैपिटल-इंटेंसिव हब्स के मुकाबले अलग है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए यह डेटा काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियां कहां केंद्रित हैं। तमिलनाडु का दम-खम मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, बेसिक मेटल्स, फार्मा और फूड प्रोडक्ट्स जैसे सेक्टर से आता है। ये सेक्टर मिलकर भारत के कुल मैन्युफैक्चरिंग GVA का 45% से ज्यादा हिस्सा बनाते हैं। साथ ही, देश की कुल मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स में 15% का योगदान अकेले तमिलनाडु का है।
आगे की राह
निवेशकों को अब राज्य में बिजली की लागत, जमीन की उपलब्धता और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट पर नजर रखनी चाहिए। भविष्य में कंपनियों के मार्जिन और प्रॉफिटेबिलिटी इसी बात पर निर्भर करेगी कि राज्य किस तरह 'हायर-वैल्यू' मैन्युफैक्चरिंग की ओर शिफ्ट होता है और अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को कैसे बेहतर बनाता है।
