Tamil Nadu के Commercial Taxes Department ने FY26 में **₹1.43 लाख करोड़** का ग्रॉस रेवेन्यू हासिल किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **4.4%** ज्यादा है। राज्य में स्टैंप ड्यूटी कलेक्शन भी **10 साल** के उच्चतम स्तर **₹25,546 करोड़** पर पहुंच गया है।
वित्त वर्ष 2026 (FY26) में तमिलनाडु का रेवेन्यू कलेक्शन ₹1,43,915 करोड़ रहा। इस बढ़त में GST और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन फीस का बड़ा हाथ रहा है।
कमाई के मुख्य स्रोत और टेक्नोलॉजी का कमाल
राज्य की कमाई का सबसे बड़ा इंजन रजिस्ट्रेशन सेक्टर रहा, जहां स्टैंप ड्यूटी में 16.3% की भारी उछाल देखी गई और यह ₹25,546 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। राज्य में कुल 35 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन हुए, जो रियल एस्टेट सेक्टर की मजबूती को दर्शाते हैं। वहीं, GST से राज्य को ₹78,120 करोड़ की कमाई हुई, जो सालाना 3.4% अधिक है।
रेवेन्यू लीकेज रोकने के लिए राज्य सरकार ने IIT-Hyderabad के साथ मिलकर एक 'बिग डेटा एनालिटिक्स' सॉल्यूशन लागू किया है। इसके जरिए दिसंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच ₹6,220 करोड़ का टैक्स रिकवर किया गया है। इसमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और पुराने असेसमेंट्स की बारीकी से जांच शामिल थी।
फिस्कल चुनौतियां और कर्ज का दबाव
टैक्स कलेक्शन में सुधार के बावजूद, तमिलनाडु की फिस्कल स्थिति पर चिंता बरकरार है। कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर बढ़ते खर्च के कारण राज्य का रेवेन्यू डेफिसिट (Revenue Deficit) बना हुआ है। खर्चों को पूरा करने के लिए राज्य अब भी मार्केट बोरिंग (Market Borrowings) पर निर्भर है, जिससे ब्याज और पेंशन जैसी देनदारियों का बोझ बना रहता है।
आगे की राह
आने वाले समय में रियल एस्टेट मार्केट की सुस्ती या कंजम्पशन पैटर्न में बदलाव का असर टैक्स रेवेन्यू पर पड़ सकता है। ऐसे में राज्य सरकार का डिजिटल टैक्स कंप्लायंस और रेवेन्यू डेफिसिट को मैनेज करना ही भविष्य की फिस्कल हेल्थ के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
