तमिलनाडु सरकार की ₹30 प्रति किलो वाली सब्सिडी राइस स्कीम विवादों में घिर गई है। AIADMK नेता आर.बी. उदयकुमार ने अनाज की खराब क्वालिटी और खरीद प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाया है।
तमिलनाडु सरकार की सब्सिडी वाली चावल योजना इन दिनों सवालों के घेरे में है। विपक्षी पार्टी AIADMK के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने इस योजना की पारदर्शिता पर कड़ा प्रहार किया है। उनका आरोप है कि यह योजना जन कल्याण के नाम पर अनाज की हेराफेरी का जरिया बन सकती है।
क्वालिटी पर उठे गंभीर सवाल
अरियालुर, सलेम और नमक्कल जैसे जिलों से आई शिकायतों के अनुसार, सरकार द्वारा वितरित किया जा रहा चावल बेहद खराब क्वालिटी का है। उपभोक्ताओं का कहना है कि चावल से दुर्गंध आ रही है और यह खाने योग्य नहीं है। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है।
व्हाइट पेपर की मांग
AIADMK ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार से तुरंत एक 'व्हाइट पेपर' जारी करने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अनाज कहां से खरीदा गया, कितनी मात्रा में खरीदा गया और इसकी खरीद कीमत क्या थी।
मार्केट और इकोनॉमी पर असर
इस योजना में ₹30 प्रति किलो की कीमत और खुले बाजार में ₹60 प्रति किलो के भाव के बीच का बड़ा अंतर सरकार पर भारी पड़ रहा है। निवेशकों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि:
- टेंडर प्रक्रिया: अगर सरकार जांच के आदेश देती है, तो टेंडर नियमों में बदलाव और सप्लायर्स के लिए सख्त क्वालिटी ऑडिट अनिवार्य हो सकते हैं।
- प्रशासनिक दबाव: सरकारी खजाने और संसाधन आवंटन पर बढ़ती निगरानी का सीधा असर उन ठेकेदारों पर पड़ सकता है जो सरकार के साथ सप्लाई चेन का हिस्सा हैं।
फिलहाल, बाजार की नजर इस बात पर है कि राज्य प्रशासन इन आरोपों का क्या जवाब देता है। यदि यह मामला आगे बढ़ता है, तो भविष्य में राज्य की खाद्य वितरण नीतियों और प्रोक्योरमेंट गाइडलाइंस में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
