Tamil Nadu: अब उद्योगों को मिलेंगे झटपट अप्रूवल! 21 दिन में क्लियर होगी फाइलें

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Tamil Nadu: अब उद्योगों को मिलेंगे झटपट अप्रूवल! 21 दिन में क्लियर होगी फाइलें

तमिलनाडु सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब से किसी भी औद्योगिक मंजूरी के लिए 21 दिन की समय-सीमा तय की गई है। अगर इस अवधि में आवेदन पर कार्रवाई नहीं हुई, तो उसे 'डीम्ड अप्रूवल' मान लिया जाएगा। यह नई नीति राज्य में **₹1 लाख करोड़** के निवेश को तेज़ी से ज़मीन पर उतारने में मदद करेगी।

क्या है नई मंजूरी नीति?

तमिलनाडु सरकार एक नई कानून लाने की तैयारी में है, जिसके तहत औद्योगिक मंजूरी के लिए 21 दिनों की एक वैधानिक समय-सीमा निर्धारित की जाएगी। इस नई नीति के अनुसार, अगर सरकारी विभागों ने तीन हफ़्तों के अंदर किसी लाइसेंस या 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) के आवेदन पर कोई फैसला नहीं लिया, तो उसे स्वतः ही 'स्वीकृत' (Deemed Approved) मान लिया जाएगा। इस कदम का मकसद नौकरशाही की बाधाओं को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक परियोजनाओं को शुरूआती सेटअप के दौरान अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।

₹1 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य

यह नीति बदलाव ऐसे समय में आ रहा है जब राज्य अपने निवेश प्रस्तावों को हकीकत में बदलने की कोशिशों को तेज़ कर रहा है। अपने पहले 100 दिनों में, तमिलनाडु प्रशासन ने ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा के निवेश के वादे हासिल किए हैं। अगस्त के मध्य में आयोजित 'वेट्ट्री तमिलनाडु इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव 2026' के दौरान, राज्य ने ₹67,452 करोड़ के 97 मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) पर हस्ताक्षर किए थे। इन बड़े निवेशों को संभालने के लिए, सरकार 'तमिलनाडु इन्वेस्टर प्रमोशन कमीशन' की स्थापना कर रही है। यह कमीशन, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे, ₹200 करोड़ से ज़्यादा की बड़ी परियोजनाओं या 5,000 से ज़्यादा नौकरियां पैदा करने वाली परियोजनाओं की निगरानी करेगा। इसका मुख्य काम बड़े विकास कार्यों में अक्सर बाधा डालने वाली अंतर-विभागीय अड़चनों को दूर करना होगा।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

निवेशकों के लिए, इस सुधार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हस्ताक्षरित MoUs को ऑपरेशनल सुविधाओं में बदलने की 'कन्वर्ज़न रेट' कितनी रहती है। 21-दिवसीय विंडो 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन राज्य को अपने पड़ोसी क्षेत्रों से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है जो आक्रामक प्रोत्साहन दे रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि नीति की घोषणा जितनी महत्वपूर्ण है, उसका कार्यान्वयन भी उतना ही ज़रूरी है, क्योंकि उद्योगों को पूंजी खर्च को सही ठहराने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर दक्षता की आवश्यकता होती है।

आगे क्या?

नियामक सुधारों से परे, उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया है कि स्थायी विकास के लिए बुनियादी ढांचे पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। लॉजिस्टिक्स और परिवहन में सुधार, जिसमें चेन्नई के लिए एक नया हवाई अड्डा भी शामिल है, पर चर्चा चल रही है। ये सभी बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधि का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। नई मंजूरी प्रणाली की प्रभावशीलता और इन्वेस्टर प्रमोशन कमीशन का प्रदर्शन महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु होंगे। निवेशक संभवतः इस 21-दिवसीय विंडो के लिए विधायी समय-सीमा और आने वाली तिमाहियों में प्रशासनिक परिवर्तनों से परियोजनाओं के तेजी से शुरू होने की उम्मीद करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.