DMK नेता थंगम थेनारासु ने TVK सरकार के उस दावे पर सवाल खड़ा किया है, जिसमें मार्केट बॉरोइंग में **21%** की कमी बताई गई है। विपक्ष का आरोप है कि बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं के भुगतान रोकने की वजह से ऐसा हुआ है, जबकि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए कर्ज का लक्ष्य **₹48,000 करोड़** तय किया गया है।
तमिलनाडु का वित्तीय परिदृश्य (Fiscal Landscape) तब गरमा गया जब पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने TVK सरकार की रिपोर्टिंग को चुनौती दी। विवाद की मुख्य वजह सरकार द्वारा जारी वो डेटा है, जिसमें चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में मार्केट बॉरोइंग में 21 फीसदी की गिरावट दिखाई गई है। जहां सरकार इसे बेहतर वित्तीय प्रबंधन बता रही है, वहीं विपक्ष इसे भ्रामक करार दे रहा है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च को लेकर चिंता
विपक्ष का कहना है कि यह गिरावट कार्यकुशलता के कारण नहीं, बल्कि अटके हुए डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और ठेकेदारों को भुगतान न किए जाने की वजह से आई है। आरोप है कि इंफ्रा प्रोजेक्ट्स का फंड रोककर सरकार ने अपना कर्ज अस्थायी रूप से कम दिखाया है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार से अप्रैल से सितंबर के बीच हुए वास्तविक खर्चों पर पारदर्शिता की मांग की है।
पूर्व बजट से तुलना करते हुए विपक्ष ने बताया कि 2025-26 के बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹57,231 करोड़ आवंटित किए गए थे। CAG के रिकॉर्ड के मुताबिक, मेट्रो रेल जैसी बड़ी परियोजनाओं पर ₹13,002.22 करोड़ खर्च हुए थे। विपक्ष का तर्क है कि मौजूदा सरकार पारदर्शिता की कमी दिखा रही है, जो वित्तीय तनाव (Financial Stress) का संकेत हो सकता है।
भविष्य की उधार योजना पर सवाल
आने वाले समय के लिए सरकार का बॉरोइंग प्लान कई और सवाल खड़े कर रहा है। पहली छमाही में उधार कम रहने के बावजूद, सरकार ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए ₹48,000 करोड़ का कर्ज लेने का लक्ष्य रखा है। यह पिछली तिमाही के ₹23,500 करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है।
यह बड़ी उछाल इस बात की ओर इशारा कर रही है कि सरकार कैश क्रंच (Cash Crunch) से जूझ रही है और अटके हुए प्रोजेक्ट्स को शुरू करने के लिए उसे बड़े कर्ज का सहारा लेना पड़ सकता है। स्टेकहोल्डर्स के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी कर्ज का यह बोझ विकास कार्यों की रफ्तार को कितना धीमा करेगा और ठेकेदारों के बकाये का निपटान कैसे किया जाएगा।
