Tamil Nadu सरकार ने Business Facilitation (Amendment) Bill, 2026 पेश किया है, जिसके तहत नई कंपनियों को अब केवल **21** दिनों के भीतर रेगुलेटरी क्लीयरेंस मिल जाएगी। तय समय सीमा में काम न होने पर इसे 'ऑटोमैटिक अप्रूव्ड' माना जाएगा, जो बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ाएगा।
रेड टेप (Red Tape) का खात्मा
Tamil Nadu सरकार की ओर से पेश किए गए इस नए बिल का मुख्य उद्देश्य व्यापार करने में आसानी (Ease of doing business) को बढ़ावा देना है। 21 दिनों की अनिवार्य समय सीमा के साथ, अब विभाग सरकारी फाइलों को लटका कर नहीं रख पाएंगे। यदि विभाग इस तीन-हफ्ते की अवधि में आवेदन प्रोसेस नहीं करते हैं, तो उस प्रोजेक्ट को स्वतः ही 'डीम्ड अप्रूवल' मिल जाएगा। यह कदम सरकारी दफ्तरों में होने वाली देरी को खत्म करने और औद्योगिक वातावरण को पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।
बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए स्पेशल कमिशन
बड़ी इन्वेस्टमेंट के लिए सरकार 'Tamil Nadu Investment Promotion Commission' का गठन कर रही है। चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में यह संस्था उन प्रोजेक्ट्स पर नजर रखेगी जिनमें कम से कम ₹200 करोड़ का निवेश हो या 5,000 नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य हो। यह हाई-लेवल बॉडी यह सुनिश्चित करेगी कि बड़े प्रोजेक्ट्स को प्रशासनिक बाधाओं का सामना न करना पड़े।
इन्वेस्टमेंट का नया अध्याय
'Vetri Tamil Nadu Investment Conclave 2026' के दौरान सरकार ने 97 मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किए हैं। राज्य ने अपने पहले 100 दिनों के कार्यकाल में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का वादा हासिल किया है। सरकार का पूरा जोर इन कागजी वादों को तेजी से जमीनी हकीकत में बदलने पर है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
हालांकि यह कानून काफी क्रांतिकारी है, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि यह केवल राज्य के नियमों पर लागू है। केंद्र सरकार के पर्यावरण या सुरक्षा से जुड़े कानूनों में यह 21 दिन की समय सीमा अनिवार्य नहीं होगी। यानी, कुछ मामलों में मंजूरी के लिए लंबा समय लग सकता है। अब देखना यह है कि राज्य के अलग-अलग विभाग आपस में तालमेल बिठाकर इस कानून को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाते हैं।
