तमिलनाडु के फाइनेंस सेक्रेटरी एम.ए. सिद्दीकी ने राज्य में आर्थिक सुस्ती की खबरों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में पोस्ट-सेटलमेंट GST रेवेन्यू **₹44,266 करोड़** तक पहुंच गया है, जो **16.1%** की ग्रोथ दिखाता है।
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में आर्थिक सुस्ती के दावों को नकारते हुए साफ किया है कि ग्रॉस GST कलेक्शन के आंकड़े अब राज्य की वित्तीय सेहत का सही पैमाना नहीं रहे। फाइनेंस सेक्रेटरी एम.ए. सिद्दीकी के मुताबिक, सेंटर के साथ सेटलमेंट के बाद राज्य के पास जो पैसा बचता है, उसमें 16.1% की दमदार वृद्धि दर्ज की गई है।\n\nसितंबर 2026 में ग्रॉस GST कलेक्शन में 5% की गिरावट को लेकर राज्य सरकार ने इसे आर्थिक कमजोरी नहीं, बल्कि सितंबर 2025 में लागू हुए GST 2.0 फ्रेमवर्क का असर बताया है। इस नई व्यवस्था में टैक्स रेट्स को 28% से घटाकर 18% किया गया है, जिसका असर ऑटोमोबाइल और ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टरों पर साफ दिख रहा है।\n\nइस पॉलिसी बदलाव के कारण कंपनियां अब कैश पेमेंट के बजाय इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे कागजों पर दिखने वाला ग्रॉस कलेक्शन कम हो गया है। हालांकि, राज्य सरकार के इन तर्कों के बाद भी अर्थशास्त्री इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या यह बदलाव किसी बड़े उपभोग (Consumption) संकट को छिपाने की कोशिश है। आने वाले महीनों में GST काउंसिल के फैसलों पर निवेशकों की नजर टिकी रहेगी क्योंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियमों में कोई भी बदलाव सीधे राज्य के खजाने पर असर डालेगा।
