Tamil Nadu Debt: कर्ज की लिमिट के भीतर तमिलनाडु, लेकिन बढ़ते घाटे ने बढ़ाई चिंता

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AuthorMehul Desai|Published at:
Tamil Nadu Debt: कर्ज की लिमिट के भीतर तमिलनाडु, लेकिन बढ़ते घाटे ने बढ़ाई चिंता

CAG की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु का Debt-to-GSDP रेश्यो **27.38%** है, जो **28.90%** की निर्धारित सीमा के भीतर है। हालांकि, ऑडिट में बढ़ते रेवेन्यू घाटे और पावर सेक्टर की चुनौतियों को लेकर चेतावनी दी गई है।

CAG की साल 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट में तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति का पूरा कच्चा-चिट्ठा सामने आया है। रिपोर्ट से यह तो साफ है कि राज्य पर कर्ज का बोझ फिलहाल काबू में है, लेकिन सरकारी खर्च और बिजली कंपनियों की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान खड़े किए गए हैं।

कर्ज का स्तर लिमिट के अंदर

रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु पर कुल कर्ज ₹8.53 लाख करोड़ है। अगर राज्य के इकोनॉमिक आउटपुट यानी GSDP से तुलना करें, तो यह अनुपात 27.38% बैठता है। यह 15वें फाइनेंस कमीशन द्वारा तय की गई 28.90% की सीमा के अंदर है। पिछले दो सालों में राज्य की 16% इकोनॉमिक ग्रोथ ने इस स्थिति को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई है।

क्यों बढ़ रहा है वित्तीय दबाव?

कर्ज का अनुपात सही होने के बावजूद, राज्य का रेवेन्यू और फिस्कल डेफिसिट चिंताजनक है। साल 2024-25 में रेवेन्यू घाटा बढ़कर ₹45,840 करोड़ हो गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹45,121 करोड़ था।

वित्तीय दबाव का मुख्य कारण 'कमिटेड एक्सपेंडिचर' (Committed Expenditure) है, जिसमें सैलरी, पेंशन और ब्याज का भुगतान शामिल है। यह अनिवार्य खर्चा कुल रेवेन्यू एक्सपेंडिचर का लगभग 53.75% हिस्सा खा रहा है। इसके अलावा, राज्य की कुल रेवेन्यू कमाई का 21% केवल ब्याज चुकाने में ही खर्च हो रहा है, जिससे नए डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए फंड की कमी हो रही है।

पावर सेक्टर की बड़ी समस्या

ऑडिट में राज्य के एनर्जी सेक्टर की लापरवाही भी सामने आई है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे न होने की वजह से बिजली की मांग और आपूर्ति में गैप बन गया है। इसकी भरपाई के लिए राज्य को ओपन मार्केट से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है, जिसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है।

निवेशकों के लिए आगे की राह

जो लोग राज्य की आर्थिक सेहत पर नजर रख रहे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि कुल कर्ज भले ही सुरक्षित दायरे में हो, लेकिन बढ़ता घाटा राज्य की फ्लेक्सिबिलिटी को कम कर रहा है। आने वाले समय में राज्य के बजट और CAG के अपडेट्स पर नजर रखना जरूरी होगा, ताकि यह पता चल सके कि घाटे को कम करने और पावर प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.