तमिलनाडु की इंडस्ट्रीज मिनिस्टर S Keerthana अब बेंगलुरु में निवेशकों को रिझाने के लिए पहुंची हैं। सरकार का लक्ष्य ₹67,452 करोड़ के समझौतों को जमीन पर उतारना है, जिसमें सेमीकंडक्टर और ईवी सेक्टर पर खास फोकस है।
तमिलनाडु सरकार ने अपनी औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं को रफ्तार देने के लिए बेंगलुरु में एक खास आउटरीच प्रोग्राम शुरू किया है। इंडस्ट्रीज मिनिस्टर S Keerthana के नेतृत्व में यह डेलिगेशन सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) को तमिलनाडु लाने पर जोर दे रहा है।
क्या है सरकार का रोडमैप?
यह दौरा अगस्त 2026 में हुए 'Vettri Tamil Nadu Investors Conclave' का अगला चरण है। उस दौरान सरकार ने 97 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए थे, जिनकी कुल वैल्यू ₹67,452 करोड़ है। इन प्रोजेक्ट्स से राज्य में लगभग 1,20,000 नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार अब चेन्नई, कोयंबटूर और होसुर जैसे शहरों को बड़े निवेशकों के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में पेश कर रही है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
किसी भी राज्य में निवेश की खबरें पढ़ते समय निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि MoU सिर्फ एक 'इरादा' (Intent) होता है। असल फायदा तब दिखता है जब कंपनियां जमीन का अधिग्रहण करती हैं, जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearances) हासिल करती हैं और निर्माण कार्य शुरू करती हैं। अक्सर नीतिगत देरी और इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतों के कारण इन प्रोजेक्ट्स में देरी की संभावना बनी रहती है।
प्रतिस्पर्धा का दौर
तमिलनाडु अब बेंगलुरु जैसे स्थापित हब्स को कड़ी टक्कर देने की कोशिश में है। राज्य अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और ऑनलाइन इन्वेस्टर पोर्टल के दम पर कंपनियों को लुभा रहा है। हालांकि, राज्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन मेगा प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से फैक्ट्री फ्लोर तक पहुंचा पाता है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कितने प्रोजेक्ट्स की 'ग्राउंड-ब्रेकिंग' होती है और कितनी कंपनियां वादे के मुताबिक पूंजी निवेश (Capex) शुरू करती हैं।
