तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay की सरकार इन दिनों बड़े भ्रष्टाचार विरोधी जांचों के चलते सुर्खियों में है। लेकिन पूर्व विरोधियों को पार्टी में शामिल करने के फैसले ने प्रशासनिक स्थिरता और सरकारी साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।
मई 2026 में सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay का मुख्य फोकस पुरानी अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई रहा है। लेकिन अब यह अभियान कानूनी और राजनीतिक पेचीदगियों में फंसता नजर आ रहा है।
जांच एजेंसियों का शिकंजा
राज्य की विजिलेंस और एंटी-करप्शन एजेंसी (DVAC) एक्शन मोड में है। 29 अक्टूबर 2026 को पूर्व म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन मिनिस्टर KN Nehru से जुड़े 25 ठिकानों पर छापेमारी हुई। मामला ₹634 करोड़ के कथित 'कैश-फॉर-जॉब्स' स्कैम से जुड़ा है, जिसमें 2,500 से ज्यादा पदों पर धांधली का आरोप है। इससे पहले, 26 अक्टूबर 2026 को पूर्व स्कूल एजुकेशन मिनिस्टर Anbil Mahesh Poyyamozhi को प्राइवेट स्कूलों की मंजूरी में फ्रॉड के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मद्रास हाईकोर्ट में चल रही इन मामलों की सुनवाई यह तय करेगी कि राज्य में कानून का शासन कितना मजबूत है, जो निवेश के लिए एक बड़ा पैरामीटर है।
राजनीतिक भर्ती और विश्वसनीयता का संकट
सरकार के लिए दूसरी बड़ी चुनौती हालिया राजनीतिक समीकरण हैं। सितंबर 2026 में पार्टी ने 16 पूर्व AIADMK नेताओं को अहम पदों पर शामिल किया। आलोचकों का कहना है कि एक तरफ 'क्लीन गवर्नेंस' का वादा और दूसरी तरफ पूर्व विरोधियों को साथ लाना प्रशासन की छवि के लिए विरोधाभासी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की अस्थिरता से प्रशासनिक फैसलों और प्रोजेक्ट्स के अमल में देरी हो सकती है, जो बिजनेस कम्युनिटी के लिए चिंता का विषय है।
आगे की राह
आने वाले महीनों में सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि वह निष्पक्ष रूप से कानून का पालन कैसे करवाती है। उपचुनाव और कोर्ट की कार्यवाही के बीच, निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या सरकार अपनी चुनावी रणनीति को गवर्नेंस से अलग रख पाती है या नहीं।
