तमिलनाडु बजट: नए सरकारी खर्च पर चोट, कैपिटल एक्सपेंडिचर में 20% की गिरावट, कर्ज बढ़ा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
तमिलनाडु बजट: नए सरकारी खर्च पर चोट, कैपिटल एक्सपेंडिचर में 20% की गिरावट, कर्ज बढ़ा

नई तमिलनाडु सरकार के सामने पहली बजट पेश करने से पहले ही बड़े वित्तीय संकट खड़े हो गए हैं। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) में **20%** की भारी गिरावट आई है। हालांकि टैक्स कलेक्शन मजबूत बना हुआ है, लेकिन रोजमर्रा के बढ़ते खर्चों और बढ़ते कर्ज ने राज्य को दिग्गज अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त करने पर मजबूर कर दिया है।

घाटे की ओर तमिलनाडु सरकार

तमिलनाडु की नई तमिलगा வெற்றி கழகम (TVK) सरकार अपने पहले राज्य बजट को पेश करने की तैयारी में जुटी है, लेकिन सामने वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़े, जो मई में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद की अवधि को कवर करते हैं, बताते हैं कि राजस्व बढ़ाने और खर्चों की प्राथमिकता में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है।

बढ़ता खर्च और घटता निवेश

जहां राज्य के अपने कर राजस्व संग्रह में लगातार वृद्धि देखी गई है, वहीं दूसरी ओर राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) यानी रोजमर्रा के कामों, जैसे - वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर होने वाले खर्चों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर और दीर्घकालिक विकास पर हुआ है। कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure), यानी सड़कों, पुलों और स्कूलों जैसी भौतिक संपत्तियों के निर्माण पर होने वाले खर्च में पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 20% की कमी आई है।

अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर में यह कमी दीर्घकालिक आर्थिक विकास को धीमा कर सकती है। साथ ही, राज्य पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। निवेशकों और बाजार के लिए, बढ़ते कर्ज और विकासशील संपत्तियों में कम निवेश का यह मेल मजबूत वित्तीय प्रबंधन की जरूरत की ओर इशारा करता है।

आर्थिक सुधार के लिए नई समिति

इन वित्तीय मुश्किलों से निपटने के लिए, राज्य सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता मशहूर अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया कर रहे हैं। इस पैनल का मुख्य उद्देश्य ऐसे सुझाव देना है जिनसे राज्य के राजस्व को बढ़ाया जा सके और कर्ज व खर्चों को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सके।

आने वाले बजट में यह देखना अहम होगा कि सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं को वित्तीय अनुशासन के साथ कैसे संतुलित करती है। निवेशक और हितधारक बजट में फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit), कर्ज-से-जीएसडीपी अनुपात (Debt-to-GSDP ratio) को लेकर स्पष्ट लक्ष्यों पर नजर रखेंगे, और यह भी कि राज्य आने वाली तिमाहियों में कैपिटल एक्सपेंडिचर ग्रोथ को सफलतापूर्वक कैसे बढ़ा पाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.