तमिलनाडु सरकार ने अपनी खराब होती फिस्कल हेल्थ को सुधारने के लिए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Montek Singh Ahluwalia की अध्यक्षता में एक 'Revenue Augmentation Committee' का गठन किया है। इस समिति का मुख्य लक्ष्य राज्य पर चढ़े **₹13.18 लाख करोड़** के भारी-भरकम कर्ज को कम करना और राजस्व (Revenue) के नए स्रोत खोजना है।
तमिलनाडु सरकार ने राज्य की बिगड़ती आर्थिक सेहत को संभालने के लिए एक कड़ा रुख अपनाया है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Montek Singh Ahluwalia की अध्यक्षता वाली यह नई समिति राज्य के टैक्स और नॉन-टैक्स इनकम को बढ़ाने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार कर रही है।
आर्थिक दबाव और चुनौतियां
मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो राज्य सरकार के सामने ₹13.18 लाख करोड़ का विशाल कर्ज एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा, राज्य का 'Own-tax-to-GSDP' अनुपात ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है, जो कि फिस्कल मैनेजमेंट के लिए एक चिंता का विषय है।
क्या है मास्टर प्लान?
समिति का पूरा ध्यान टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन के आधुनिकीकरण (Modernization) पर है। मुख्य बातें जो चर्चा में हैं:
- डिजिटल टूल्स: टैक्स कलेक्शन की क्षमता बढ़ाने के लिए एडवांस डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल।
- रेवेन्यू लीकेज: प्रशासनिक सख्ती के जरिए राजस्व की चोरी को रोकना।
- इंडस्ट्री सुझाव: इंडस्ट्री लीडर्स ने प्रॉपर्टी गाइडलाइन वैल्यू को तर्कसंगत बनाने और FSI (Floor Space Index) की लिमिट बढ़ाने की सलाह दी है, ताकि औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) में फंसी हुई कमाई को अनलॉक किया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
बिजनेस कम्युनिटी के लिए यह खबर एक 'वॉचलिस्ट' की तरह है। भले ही इन सुधारों का मकसद बजट को संतुलित करना है, लेकिन भविष्य में आने वाले नीतिगत बदलाव, जैसे कि यूजर चार्ज या टैक्स कंप्लायंस, राज्य में व्यापार करने की लागत (Cost of Doing Business) को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, रिस्क यह भी है कि अगर सरकार टैक्स या सर्विस चार्ज में बढ़ोतरी करती है, तो इसे लेकर विरोध भी हो सकता है। अब सभी की नजरें समिति की फाइनल रिपोर्ट और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।
