Tamil Nadu Secretariat Project: ₹1,200 करोड़ के नए प्रोजेक्ट पर संकट, विरोध के चलते काम में देरी का डर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Tamil Nadu Secretariat Project: ₹1,200 करोड़ के नए प्रोजेक्ट पर संकट, विरोध के चलते काम में देरी का डर

तमिलनाडु सरकार की चेन्नई में **₹1,200 करोड़** की लागत से नया सचिवालय बनाने की योजना विवादों में घिर गई है। स्थानीय मछुआरा बस्तियों और राजनीतिक दलों के भारी विरोध के कारण इस **25.55 एकड़** के प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने से पहले ही कानूनी और एग्जीक्यूशन संबंधी जोखिम खड़े हो गए हैं।

चेन्नई के पट्टिनपक्कम इलाके में नया सचिवालय और विधानसभा परिसर बनाने की सरकारी योजना के खिलाफ जन आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 8 सितंबर, 2026 को जारी सरकारी आदेश के बाद से यह ₹1,200 करोड़ का प्रोजेक्ट विवाद का केंद्र बन गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित 25.55 एकड़ जमीन का बड़ा हिस्सा तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड के पास है, साथ ही इसमें ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन और राजस्व विभाग की जमीन भी शामिल है।

विस्थापन और पर्यावरण का संकट

सबसे बड़ी चिंता 1,500 से अधिक परिवारों के विस्थापन की है, जो 12 तटीय मछुआरा बस्तियों में रहते हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि सरकार ने इनके पुनर्वास और आजीविका के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। पर्यावरणविदों ने भी चेतावनी दी है कि यह इलाका ऑलिव रिडले कछुओं का प्रजनन स्थल है। निर्माण कार्य से तटीय कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, साथ ही शहर के ट्रैफिक पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।

सरकारी खर्च और प्रोजेक्ट में अनिश्चितता

CPI, CPI(M) और PMK जैसे राजनीतिक दल सवाल उठा रहे हैं कि जब ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज पहले से ही चालू है, तो इतने बड़े बजट के नए कॉम्प्लेक्स की क्या जरूरत है? इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस तरह का जन-विरोध अक्सर कानूनी अड़चनों और विरोध-प्रदर्शनों को जन्म देता है, जिससे प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने और समय पर पूरा न होने का जोखिम पैदा हो जाता है।

निवेशकों के लिए काम की बात

इस प्रोजेक्ट का भविष्य अब सरकार द्वारा विरोध को संभालने के तरीके पर टिका है। कोर्ट का रुख, प्रोजेक्ट साइट में संभावित बदलाव या अनिवार्य जनसुनवाई की प्रक्रिया इस बात पर नजर रखने के मुख्य बिंदु हैं। अगर सरकार विरोध के बावजूद आगे बढ़ती है, तो Detailed Project Report (DPR) और टेंडर प्रक्रिया में होने वाली देरी ही यह बताएगी कि प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा होगा या इसे शहर के बाहर किसी अन्य साइट पर शिफ्ट करना पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.