तमिलनाडु विधानसभा में पटाखे बनाने के लाइसेंस को लेकर सत्ताधारी TVK और विपक्ष DMK के बीच तीखी बहस हुई है। मंत्री सेल्वी एस. कीर्तना ने पुराने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, वहीं DMK ने मौजूदा प्रशासन पर अनियमितताओं का दावा किया है, जिससे विरुधुनगर के मैन्युफैक्चरर्स के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
तमिलनाडु विधानसभा का सत्र मंगलवार को तब गरमा गया जब पटाखे बनाने के लाइसेंस के मुद्दे पर TVK और DMK आमने-सामने आ गए। यह बहस मुख्य रूप से विरुधुनगर क्षेत्र में फैक्ट्रियों को लाइसेंस जारी करने और उनके नवीनीकरण में कथित रिश्वतखोरी को लेकर थी, जो भारत में पटाखों का सबसे बड़ा हब माना जाता है।
मंत्री ने क्या दावे किए?
उद्योग मंत्री सेल्वी एस. कीर्तना ने पूर्ववर्ती सरकार पर भ्रष्टाचार को संस्थागत बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के दौरान फैक्ट्री मालिकों को लाइसेंस पाने के लिए ₹3 लाख से ₹5 लाख तक की रिश्वत देने पर मजबूर किया जाता था। मंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार ने अब तक 177 लाइसेंस का नवीनीकरण बिना किसी अवैध भुगतान के सफलतापूर्वक किया है।
विपक्ष का पलटवार
पूर्व मंत्री और DMK के वरिष्ठ नेता थंगम थेन्नारासु ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को उद्योग से जुड़े लोगों से ऐसी खबरें मिली हैं कि मौजूदा सरकार भी तेजी से लाइसेंस अप्रूवल के बदले अवैध वसूली कर रही है। DMK ने सरकार को चुनौती दी कि वे अपनी प्रक्रिया की पारदर्शिता साबित करें, क्योंकि उनके अनुसार लाइसेंस का तेज अप्रूवल प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि लेनदेन का परिणाम हो सकता है।
पटाखे उद्योग पर क्या असर होगा?
राजनीतिक बयानबाजी से इतर, यह पूरा विवाद पटाखे उद्योग के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। इस समय विरुधुनगर में सरकारी ऑडिट और अचानक होने वाले सेफ्टी इंस्पेक्शन बढ़ गए हैं। हालांकि सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है, लेकिन दिवाली जैसे पीक सीजन के दौरान होने के कारण यह निर्माताओं के लिए मुसीबत बन गया है।
MSMEs (माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज) पर आधारित यह पूरा सेक्टर बेहद कड़े समयसीमा पर काम करता है। किसी भी तरह की प्रशासनिक देरी या बार-बार होने वाली जांच से न केवल प्रोडक्शन की लागत बढ़ेगी, बल्कि त्योहारों के समय सप्लाई कमिटमेंट्स पूरा करने में भी दिक्कतें आ सकती हैं। निवेशकों को इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि लाइसेंसिंग प्रक्रिया में अनिश्चितता का असर इस उद्योग के मुनाफे पर पड़ सकता है।
